Kerala looks to the skies to tackle human-wildlife conflict, but is this feasible? (July 17, 2026) – दैनिक समसामयिकी विश्लेषण

परिचय एवं वर्तमान संदर्भ

भारत में मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict – HWC) एक गंभीर पर्यावरणीय और सामाजिक-आर्थिक संकट बन चुका है। विशेष रूप से उन राज्यों में जहां घने जंगल और इंसानी बस्तियां बहुत करीब हैं। केरल इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। यहां की घनी आबादी और समृद्ध जैव विविधता इस टकराव को और बढ़ा देती है। वायनाड, पलक्कड़ और इडुक्की जैसे जिलों में यह संघर्ष अब हर दिन की कहानी बन चुका है। बाघ, तेंदुए, हाथी और जंगली सूअर भोजन की तलाश में बस्तियों का रुख करते हैं। वे फसलों को तहस-नहस करते हैं, मवेशियों को शिकार बनाते हैं और कई बार इंसानों की जान भी ले लेते हैं।

इस संकट का हल खोजने के लिए केरल वन विभाग एक नया और अनोखा प्रस्ताव लेकर आया है। विभाग संघर्ष वाले इलाकों से पकड़े गए अनुसूची-I (Schedule-I) के वन्यजीवों (जैसे बाघ और तेंदुए) को भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टरों की मदद से सुरक्षित और दूरराज के जंगलों में पहुंचाना चाहता है। यह प्रस्ताव वायनाड में बाघ के हमले से एक किसान की मौत और उसके बाद भड़के जन-आक्रोश के बाद आया है। वन विभाग का मानना है कि सड़क मार्ग की तुलना में हवाई मार्ग से जानवरों को स्थानांतरित करना उनके लिए कम तनावपूर्ण होगा। इससे काम जल्दी और सुरक्षा के साथ पूरा होगा। हालांकि, वन्यजीव वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं के बीच इस योजना की पारिस्थितिक और आर्थिक व्यवहार्यता को लेकर एक गंभीर बहस छिड़ गई है।

पाठ्यक्रम प्रासंगिकता

मुख्य परीक्षा (Mains) में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए आपको इस विषय को पाठ्यक्रम के इन महत्वपूर्ण हिस्सों से जोड़कर पढ़ना चाहिए:

परीक्षा पेपर संबद्ध विषय
GS पेपर-III पर्यावरण संरक्षण, पारिस्थितिकी गिरावट, आपदा प्रबंधन, और आंतरिक सुरक्षा (संघर्ष के कारण पैदा होने वाला जन-आक्रोश)।
GS पेपर-II शासन (विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय और नीति निर्माण)।

यह मुद्दा सीधे तौर पर वन्यजीव संरक्षण, पारिस्थितिकी संतुलन, मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व और सतत विकास से जुड़े आपके ज्ञान को परखता है।

प्रमुख बिंदु और संरचनात्मक चुनौतियां

केरल के प्रस्ताव के मुख्य बिंदु:

केरल वन विभाग भारतीय वायु सेना के Mi-17 जैसे मध्यम-लिफ्ट हेलीकॉप्टरों का उपयोग करना चाहता है। इसके जरिए आबादी वाले इलाकों से पकड़े गए बाघों और तेंदुओं को राज्य के अंदर ही सुरक्षित जंगलों में पहुंचाया जाएगा।

  • प्रस्ताव के समर्थन में तर्क:
    • तेज और सुरक्षित सफर: सड़क मार्ग से पिंजरे में बंद जानवर को ले जाने में काफी समय लगता है। हवाई मार्ग इस समय को घटा देगा, जिससे बेहोश जानवर पर यात्रा का मानसिक और शारीरिक दबाव कम होगा।
    • दुर्गम इलाकों तक आसान पहुंच: हेलीकॉप्टर सीधे उन घने जंगलों या पहाड़ी चोटियों पर पहुंच सकते हैं जहां सड़कें नहीं हैं।
    • सुरक्षा बल और कर्मियों की सुरक्षा: जमीनी रास्ते से जाते समय भीड़ के हमले या विरोध का खतरा रहता है। हवाई सफर इस खतरे को समाप्त कर देता है।
    • सफलता की ऊंची दर: कम समय में सुरक्षित परिवहन से जानवर के बचने और नए माहौल में ढलने की संभावना सुधरती है।

प्रस्ताव के खिलाफ तर्क और व्यावहारिक चुनौतियां:

इस हवाई योजना को वैज्ञानिक और आर्थिक मोर्चे पर कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है:

  1. जानवरों की सेहत पर बुरा असर:
    जंगली जानवर को बेहोश करना, उसे काबू में करना और हेलीकॉप्टर के तेज शोर तथा कंपन के बीच हवा में ले जाना उसके दिल और दिमाग पर भारी चोट पहुंचा सकता है। यह वैसा ही है जैसे किसी डरे हुए मरीज को अचानक किसी तेज शोर वाले रोलर-कोस्टर पर बैठा दिया जाए।
  2. नए माहौल में तालमेल की समस्या:
    बाघ या तेंदुआ अपनी एक सीमा (Territory) तय करते हैं। नए जंगल में छोड़े जाने पर वहां पहले से मौजूद शिकारी जीव उनका विरोध करेंगे। इस खूनी वर्चस्व की जंग में नया जानवर मारा जा सकता है या भोजन की कमी के कारण वह दोबारा बस्तियों की ओर भाग सकता है।
  3. वहन क्षमता (Carrying Capacity) का संकट:
    जंगल की भी एक क्षमता होती है। अगर आप एक कमरे में क्षमता से ज्यादा लोगों को रखेंगे, तो विवाद तय है। नए शिकारी जीव के आने से उस जंगल में शिकार कम पड़ जाएंगे, जिससे स्थानीय पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ जाएगा।
  4. बेहिसाब खर्च:
    भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टरों को उड़ाना बेहद खर्चीला काम है। हर घंटे का उड़ान खर्च लाखों रुपये में होता है। इतने बड़े बजट का उपयोग जंगलों की सीमा पर सौर ऊर्जा से चलने वाली बाड़ लगाने, नए कॉरिडोर बनाने या प्रभावित किसानों को समय पर मुआवजा देने में किया जा सकता है।
  5. मौसम और रसद की समस्याएं:
    केरल का मौसम खासकर मानसूनी महीनों में बहुत अनिश्चित होता है। घने कोहरे या बारिश में हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर सकते। इसके अलावा घने वनों में सुरक्षित लैंडिंग और टेक-ऑफ के लिए जगह खोजना भी एक बड़ी चुनौती है।
  6. मूल समस्या की अनदेखी:
    यह योजना केवल एक फौरी इलाज है, बीमारी की जड़ का समाधान नहीं। जब तक हम जंगलों का घटना, इंसानी अतिक्रमण और शिकारियों के भोजन की कमी को दूर नहीं करेंगे, तब तक यह टकराव जारी रहेगा।

कानूनी और संवैधानिक प्रावधानों का विश्लेषण

सिविल सेवा परीक्षा के उम्मीदवार के रूप में आपको इन कानूनी पहलुओं को अपने उत्तर में शामिल करना चाहिए:

  • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972):
    • अनुसूची-I (Schedule-I): बाघ और तेंदुए जैसे जीव इस अनुसूची में शामिल हैं। इन्हें कानून के तहत सबसे सुरक्षित दर्जा प्राप्त है। इनका शिकार या परिवहन करना गंभीर दंडनीय अपराध है। आप इन्हें भारतीय कानून के तहत ‘Z+ सुरक्षा’ प्राप्त मान सकते हैं।
    • धारा 11 (1) (अ) [Section 11 (1) (a)]: यह धारा राज्य के मुख्य वन्यजीव वार्डन (Chief Wildlife Warden) को यह अधिकार देती है कि यदि कोई जानवर इंसानों के लिए खतरा बन गया है, तो वे उसे पकड़ने या अंतिम विकल्प के रूप में मारने की अनुमति दे सकते हैं।
    • धारा 12 [Section 12]: यह धारा वन्यजीव प्रबंधन और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए जानवरों को पकड़ने या स्थानांतरित करने की अनुमति देती है, बशर्ते मुख्य वन्यजीव वार्डन इसकी लिखित स्वीकृति दें।
    • स्थानांतरण की कानूनी प्रक्रिया: किसी भी वन्यजीव को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने से पहले वैज्ञानिक व्यवहार्यता अध्ययन और मुख्य वन्यजीव वार्डन की सहमति कानूनी रूप से अनिवार्य है।
  • भारतीय वायु सेना (IAF) की सीमाएं: वायु सेना का प्राथमिक काम देश की सीमाओं की सुरक्षा और आपदा राहत (HADR) है। वन्यजीवों को ले जाना उनके नियमित कार्यों में नहीं आता। इसके लिए रक्षा मंत्रालय और पर्यावरण मंत्रालय के बीच एक विशेष सहमति पत्र (MoU) की आवश्यकता होगी।
  • पशु कल्याण बोर्ड (AWBI): जानवरों को लाने-ले जाने के लिए भारतीय पशु कल्याण बोर्ड के कड़े नियम हैं, ताकि उन्हें किसी भी प्रकार के दर्द या उत्पीड़न से बचाया जा सके।

पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और जूनोटिक रोगों का अंतर्संबंध

पर्यावरणीय पहलू:

  • आवासों का खंडन (Habitat Fragmentation): सड़कों और बुनियादी ढांचे के निर्माण ने वन्यजीवों के रास्तों को काट दिया है। यह वैसा ही है जैसे किसी के घर के बीचों-बीच एक व्यस्त सड़क बना दी जाए और उसे बेडरूम से रसोई में जाने के लिए रोज जान जोखिम में डालकर हाईवे पार करना पड़े।
  • पारिस्थितिकी पर असर: एक नया शिकारी जीव प्राप्तकर्ता जंगल के भोजन तंत्र को प्रभावित करता है।
  • जलवायु परिवर्तन: यह जानवरों के प्राकृतिक व्यवहार को बदल रहा है और उन्हें पानी तथा भोजन के लिए इंसानी इलाकों की ओर जाने पर मजबूर कर रहा है।

आर्थिक पहलू:

  • आजीविका का नुकसान: जंगली जीवों के हमलों से किसानों की फसलें और मवेशी नष्ट हो जाते हैं, जिससे उनका जीवन संकट में पड़ जाता है। सरकारी मुआवजा मिलने की प्रक्रिया बहुत धीमी और जटिल है।
  • पर्यटन उद्योग पर प्रभाव: वन्यजीव हमलों की खबरें पर्यटन क्षेत्रों में पर्यटकों के आगमन को कम कर देती हैं, जिससे स्थानीय व्यवसायों को नुकसान होता है।
  • संरक्षण बजट पर दबाव: हेलीकॉप्टर जैसी महंगी तकनीकों का उपयोग वन विभाग के बजट को खाली कर सकता है, जिससे बुनियादी गश्त और सुरक्षा कार्य प्रभावित होंगे।

जूनोटिक रोगों का खतरा:

जब इंसान और जंगली जानवर लगातार एक-दूसरे के संपर्क में आते हैं, तो जानवरों से इंसानों में फैलने वाली जूनोटिक बीमारियों (Zoonotic Diseases) का खतरा बढ़ जाता है। निपाह और कोविड-19 जैसी बीमारियां इसके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। इसलिए, इंसानों और वन्यजीवों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखना हमारी सेहत के लिए बेहद आवश्यक है।

अभ्यास प्रश्न (प्रारंभिक परीक्षा)

प्रश्न: भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत, बाघ और तेंदुआ जैसे जीवों को किस अनुसूची में रखा गया है, जो उन्हें कानूनन उच्चतम स्तर की सुरक्षा प्रदान करती है?
A. अनुसूची-II
B. अनुसूची-III
C. अनुसूची-I
D. अनुसूची-IV

सही उत्तर: C
व्याख्या: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में दर्ज जीवों को भारत में सबसे मजबूत कानूनी संरक्षण प्राप्त है। इनके शिकार या अवैध व्यापार पर सबसे कड़े दंड दिए जाते हैं। बाघ और तेंदुआ इसी अनुसूची के अंतर्गत आते हैं।

अभ्यास प्रश्न (मुख्य परीक्षा)

प्रश्न: “केरल वन विभाग द्वारा मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए हेलीकॉप्टर का उपयोग करके अनुसूची-I वन्यजीवों के स्थानांतरण का प्रस्ताव पारिस्थितिक और आर्थिक व्यवहार्यता दोनों के दृष्टिकोण से एक जटिल मुद्दा है। इसका समालोचनात्मक विश्लेषण करें और ऐसे संघर्षों को कम करने के लिए वैकल्पिक रणनीतियों पर चर्चा करें।” (लगभग 250 शब्द)

उत्तर लेखन के लिए मुख्य बिंदु (Model Answer Outline)

इस प्रश्न का उत्तर लिखते समय आपको निम्नलिखित संरचना का पालन करना चाहिए:

  1. भूमिका (Introduction):
    केरल में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की समस्या को संक्षेप में स्पष्ट करें। इसके बाद वन विभाग के हेलीकॉप्टर स्थानांतरण प्रस्ताव का उल्लेख करें और इसे एक तात्कालिक समाधान के रूप में प्रस्तुत करें।
  2. मुख्य भाग (Body):
    • पारिस्थितिक व्यवहार्यता की चुनौतियां: वन्यजीवों पर बेहोशी और हवाई यात्रा के कारण पड़ने वाले अत्यधिक तनाव, चोट के जोखिम, नए जंगल में वर्चस्व की जंग और वहन क्षमता के संकट पर प्रकाश डालें।
    • आर्थिक व्यवहार्यता की चुनौतियां: वायु सेना के हेलीकॉप्टरों को संचालित करने में आने वाले भारी खर्च का उल्लेख करें और यह सवाल उठाएं कि क्या यह सीमित बजट का सर्वोत्तम उपयोग है।
    • वैकल्पिक रणनीतियां (दीर्घकालिक समाधान):
      • आवास सुधार: वन्यजीव गलियारों (Corridors) का संरक्षण, जंगलों में चारा और पानी की व्यवस्था करना।
      • तकनीक का प्रयोग: सौर ऊर्जा संचालित बाड़ लगाना, जीपीएस कॉलर, और ड्रोन द्वारा निगरानी प्रणाली विकसित करना।
      • समुदाय की भूमिका: प्रभावित ग्रामीणों को समय पर और पर्याप्त मुआवजा प्रदान करना तथा संरक्षण में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना।
  3. निष्कर्ष (Conclusion):
    यह निष्कर्ष निकालें कि हवाई स्थानांतरण केवल एक अस्थायी और खर्चीला कदम है। स्थाई समाधान के लिए हमें पारिस्थितिक संतुलन बहाल करने और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व की नीतियों को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

यह अध्ययन नोट IAS EasyWay की दैनिक समसामयिकी पहल का एक हिस्सा है। ऐसे ही अधिक दैनिक समसामयिकी और अध्ययन सामग्री के लिए IAS EasyWay पर निरंतर आते रहें।


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लेखक के बारे में: भाग्यश्री

भाग्यश्री एक वरिष्ठ सिविल सेवा मेंटर और शिक्षिका हैं, जिन्हें UPSC और MPSC उम्मीदवारों का मार्गदर्शन करने का 8 से अधिक वर्षों का अनुभव है। कई बार सिविल सेवा मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण करने और सैकड़ों सफल प्रशासनिक अधिकारियों को मार्गदर्शन देने के बाद, वे कठिन GS पाठ्यक्रम और CSAT पद्धतियों को व्यावहारिक अध्ययन रणनीतियों में बदलने में विशेषज्ञता रखती हैं।

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