परिचय एवं वर्तमान संदर्भ

मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict – HWC) भारत में, विशेषकर सघन वनों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों वाले राज्यों में, एक गंभीर पर्यावरणीय और सामाजिक-आर्थिक चुनौती के रूप में उभरा है। केरल, अपनी उच्च जनसंख्या घनत्व और समृद्ध जैव विविधता के साथ, इस संघर्ष का एक प्रमुख केंद्र बन गया है। हाल के वर्षों में, राज्य के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर वायनाड, पलक्कड़ और इडुक्की जिलों में, मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में लगातार वृद्धि देखी गई है, जिसमें मानव जीवन और संपत्ति का नुकसान हुआ है। बाघ, तेंदुआ, हाथी और जंगली सूअर जैसे जानवर अक्सर मानव बस्तियों में प्रवेश कर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, पशुधन पर हमला करते हैं, और कभी-कभी मनुष्यों को भी घायल या मार देते हैं।

इस बढ़ते संकट से निपटने के लिए, केरल वन विभाग ने एक अनूठा और विवादास्पद प्रस्ताव पेश किया है: संघर्ष क्षेत्रों से पकड़े गए अनुसूची-I (Schedule-I) वन्यजीवों, जिनमें बाघ और तेंदुए शामिल हैं, को भारतीय वायु सेना (IAF) के हेलीकॉप्टरों का उपयोग करके सुरक्षित और दूरस्थ वन आवासों में स्थानांतरित करना। यह प्रस्ताव हाल ही में वायनाड जिले में एक बाघ के हमले में एक किसान की मौत और उसके बाद स्थानीय लोगों के विरोध प्रदर्शनों के बाद सामने आया है, जिसने इस मुद्दे को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया है। वन विभाग का मानना है कि हवाई मार्ग से स्थानांतरण जानवरों के लिए कम तनावपूर्ण और अधिक सुरक्षित होगा, साथ ही यह ऑपरेशन की गति और दक्षता को भी बढ़ाएगा। हालाँकि, इस कदम ने अपनी पारिस्थितिक और आर्थिक व्यवहार्यता को लेकर विशेषज्ञों, पर्यावरणविदों और नीति निर्माताओं के बीच एक तीखी बहस छेड़ दी है।

पाठ्यक्रम प्रासंगिकता

यह विषय सिविल सेवा परीक्षा के सामान्य अध्ययन (GS) के पेपर से संबंधित है:

  • GS पेपर-III: पर्यावरण, संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और गिरावट, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन। आपदा और आपदा प्रबंधन। आंतरिक सुरक्षा (मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारण उत्पन्न सामाजिक अशांति)।
  • GS पेपर-II: शासन (अंतर-एजेंसी सहयोग, नीति निर्माण और कार्यान्वयन)।

विशेष रूप से, यह वन्यजीव संरक्षण, पारिस्थितिकी संतुलन, मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व, स्थायी विकास, और पर्यावरण प्रबंधन से संबंधित मुद्दों पर प्रकाश डालता है।

प्रमुख बिंदु / तर्क / संरचनात्मक मुद्दे

केरल के प्रस्ताव के मुख्य बिंदु:

केरल वन विभाग का प्रस्ताव भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टरों, संभवतः Mi-17 जैसे मध्यम-लिफ्ट हेलीकॉप्टरों का उपयोग करके, संघर्ष क्षेत्रों से पकड़े गए अनुसूची-I जानवरों, जैसे बाघों और तेंदुओं को राज्य के भीतर दूरस्थ और सुरक्षित वन क्षेत्रों में स्थानांतरित करना है।

  • प्रस्ताव के पक्ष में तर्क:
    • तेज और सुरक्षित स्थानांतरण: वन विभाग का तर्क है कि हवाई मार्ग से स्थानांतरण स्थलीय मार्ग की तुलना में बहुत तेज होगा, जिससे बेहोश किए गए जानवर पर तनाव कम होगा और वापसी की संभावना भी कम होगी।
    • दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच: हेलीकॉप्टर घने जंगल या पहाड़ी इलाकों में भी आसानी से पहुंच सकते हैं, जहां सड़क मार्ग से पहुंचना मुश्किल या असंभव होता है।
    • कर्मियों की सुरक्षा: हवाई मार्ग से स्थानांतरण जमीनी स्तर पर कर्मियों के लिए जोखिम को कम कर सकता है, जो अक्सर संघर्ष वाले जानवरों को नियंत्रित करते समय खतरे में होते हैं।
    • उच्च सफलता दर: कम यात्रा समय और बेहतर हैंडलिंग के कारण जानवरों के स्थानांतरण के बाद जीवित रहने की दर बढ़ सकती है।

प्रस्ताव के विरुद्ध तर्क / संरचनात्मक मुद्दे:

यह प्रस्ताव अपनी पारिस्थितिक और आर्थिक व्यवहार्यता को लेकर गहन आलोचना का सामना कर रहा है।

  1. पारिस्थितिक व्यवहार्यता और पशु कल्याण चिंताएँ:
    • जानवरों पर अत्यधिक तनाव: बेहोशी, कैप्चर और हवाई यात्रा की प्रक्रिया जानवरों के लिए अत्यधिक तनावपूर्ण हो सकती है, जिससे शारीरिक और मनोवैज्ञानिक आघात हो सकता है। यह उनकी जीवित रहने की क्षमता को कम कर सकता है।
    • चोट का जोखिम: हेलीकॉप्टर की टरबाइन की तेज आवाज और कंपन जानवरों को और अधिक तनावग्रस्त कर सकते हैं और परिवहन के दौरान चोटों का कारण बन सकते हैं।
    • स्थानांतरण के बाद अनुकूलन: स्थानांतरित किए गए जानवर को नए वातावरण में अनुकूलन में कठिनाई हो सकती है। वे शिकार करने, क्षेत्र स्थापित करने या अन्य वन्यजीवों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में असफल हो सकते हैं, जिससे उनकी मृत्यु हो सकती है या वे फिर से मानव बस्तियों की ओर लौट सकते हैं।
    • आनुवंशिक मिश्रण: अलग-अलग आनुवंशिक पूल से जानवरों को एक साथ रखने से स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र में आनुवंशिक अवनति या अवांछित आनुवंशिक मिश्रण हो सकता है।
    • प्राप्तकर्ता पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव: एक नए शिकारी जानवर को किसी नए क्षेत्र में छोड़ने से उस क्षेत्र की शिकार आबादी और पारिस्थितिक संतुलन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। यदि उस क्षेत्र की वहन क्षमता (carrying capacity) पहले से ही पूरी हो चुकी है, तो यह मौजूदा वन्यजीवों के लिए भी संघर्ष का कारण बन सकता है।
  2. आर्थिक व्यवहार्यता:
    • अत्यधिक लागत: भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टरों का संचालन अत्यधिक महंगा होता है। इसमें ईंधन, रखरखाव, पायलटों और अन्य कर्मियों का वेतन, और विशेष उपकरण शामिल होंगे। यह एक सतत समाधान के लिए आर्थिक रूप से अस्थिर हो सकता है।
    • संसाधन आवंटन: क्या यह इतना महंगा समाधान वन्यजीव संरक्षण के लिए संसाधनों का सबसे कुशल उपयोग है? इन निधियों का उपयोग आवास सुधार, जागरूकता कार्यक्रम, त्वरित क्षतिपूर्ति भुगतान या अन्य निवारक उपायों के लिए बेहतर तरीके से किया जा सकता है।
    • दीर्घकालिक स्थिरता: यह एक “एक बार के” समाधान की तरह दिखता है, न कि मानव-वन्यजीव संघर्ष के अंतर्निहित कारणों को संबोधित करने वाले दीर्घकालिक, टिकाऊ रणनीति के रूप में।
  3. संचालन और रसद चुनौतियाँ:
    • मौसम पर निर्भरता: हेलीकॉप्टर संचालन मौसम की स्थिति पर अत्यधिक निर्भर करता है। खराब मौसम, भारी बारिश या घने कोहरे में इसे अंजाम देना मुश्किल या असंभव हो सकता है।
    • प्रशिक्षित कर्मियों की कमी: वन्यजीवों को सुरक्षित रूप से बेहोश करने, संभालना और हेलीकॉप्टर में लोड करने के लिए अत्यधिक विशिष्ट कौशल और प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है।
    • सीमित लैंडिंग स्थल: घने वन क्षेत्रों में हेलीकॉप्टरों के लिए उपयुक्त और सुरक्षित लैंडिंग और टेक-ऑफ स्थलों की कमी एक बड़ी बाधा हो सकती है।
  4. अंतर्निहित कारणों की अनदेखी:
    • यह समाधान संघर्ष के मूल कारणों, जैसे आवास विखंडन, मानव अतिक्रमण, शिकार आधार में कमी, अपशिष्ट प्रबंधन की कमी और अवैध शिकार, को संबोधित नहीं करता है। बिना इन मूल कारणों का समाधान किए, संघर्ष की घटनाएं जारी रहेंगी, और स्थानांतरण केवल एक अस्थायी उपाय होगा।

प्रमुख शब्दों और संवैधानिक/कानूनी पहलुओं का विस्तृत विश्लेषण

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972:

यह अधिनियम भारत में वन्यजीवों के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी ढांचा प्रदान करता है।

  • अनुसूची-I (Schedule-I) जानवर: अधिनियम की अनुसूची-I में शामिल जानवर, जैसे बाघ और तेंदुआ, उच्चतम स्तर की सुरक्षा प्राप्त करते हैं। इनके शिकार (जंगली सुअर जैसे अपवादों को छोड़कर) या इन्हें परेशान करने पर कड़े दंड का प्रावधान है।
  • धारा 11 (अ): यह धारा राज्य के मुख्य वन्यजीव वार्डन को किसी ऐसे वन्यजीव को मारने या घायल करने की अनुमति देने का अधिकार देती है, जो मानव जीवन के लिए खतरा बन गया हो या जो स्थायी रूप से अक्षम हो। हालाँकि, यह ‘अंतिम उपाय’ के रूप में ही उपयोग किया जाता है।
  • धारा 12: यह धारा वैज्ञानिक अनुसंधान, वन्यजीव प्रबंधन (जिसमें स्थानांतरण शामिल हो सकता है), या शैक्षिक उद्देश्यों के लिए वन्यजीवों के अधिग्रहण या कैप्चर की अनुमति देती है, बशर्ते मुख्य वन्यजीव वार्डन द्वारा इसकी मंजूरी दी जाए।
  • स्थानांतरण की प्रक्रिया: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत, किसी भी वन्यजीव को स्थानांतरित करने से पहले, वैज्ञानिक व्यवहार्यता अध्ययन और मुख्य वन्यजीव वार्डन की अनुमति आवश्यक होती है। स्थानांतरण का उद्देश्य हमेशा जानवर के कल्याण और उसके नए निवास स्थान पर सफल अनुकूलन को सुनिश्चित करना होता है। प्रस्तावित हवाई स्थानांतरण के लिए भी इन्हीं कानूनी प्रावधानों का पालन करना होगा, और इसके लिए आवश्यक अनुमतियां और वैज्ञानिक औचित्य प्रस्तुत करना होगा।

भारतीय वायु सेना (IAF) की भूमिका:

IAF का प्राथमिक कार्य भारत की हवाई सीमाओं की रक्षा करना और रक्षा उद्देश्यों के लिए काम करना है। यह प्राकृतिक आपदाओं (बाढ़, भूकंप) के दौरान मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्यों (HADR) में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वन्यजीव स्थानांतरण, हालांकि एक मानवीय प्रयास हो सकता है, इसकी पारंपरिक भूमिका के दायरे से बाहर है। इस तरह के ऑपरेशन के लिए रक्षा मंत्रालय और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के बीच एक विशिष्ट अंतर-एजेंसी समझौता ज्ञापन (MoU) और एक स्पष्ट नीतिगत ढांचा आवश्यक होगा।

वन विभाग और पशु कल्याण बोर्ड:

वन विभाग को पशु कल्याण बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों का पालन करना होगा, जो जानवरों की ढुलाई, कैप्चर और हैंडलिंग के लिए मानदंड प्रदान करता है। हवाई स्थानांतरण की योजना बनाते समय इन दिशानिर्देशों का विशेष ध्यान रखना होगा ताकि जानवरों को अनावश्यक पीड़ा से बचाया जा सके।

एक जूनोटिक/पर्यावरण/आर्थिक संबंध

पर्यावरणीय संबंध:

  • आवास विखंडन और क्षरण: मानव-वन्यजीव संघर्ष का मूल कारण आवासों का विखंडन और क्षरण है। वनों की कटाई, कृषि विस्तार, बुनियादी ढाँचा परियोजनाएँ (सड़कें, रेलवे), और मानव बस्तियों का विस्तार वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों को कम करता है और उन्हें मानव क्षेत्रों के करीब लाता है।
  • पारिस्थितिक संतुलन: एक शिकारी जानवर का स्थानांतरण प्राप्तकर्ता पारिस्थितिकी तंत्र के नाजुक संतुलन को बाधित कर सकता है। यदि उस क्षेत्र में पहले से ही पर्याप्त शिकारी मौजूद हैं, तो नए जानवर का परिचय संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ा सकता है। इसके विपरीत, यदि क्षेत्र की शिकार आबादी सीमित है, तो यह नए शिकारी के लिए भोजन की कमी का कारण बन सकता है।
  • जलवायु परिवर्तन: जलवायु परिवर्तन भी वन्यजीवों के व्यवहार और आवासों को प्रभावित कर रहा है, जिससे वे नए क्षेत्रों में जाने के लिए मजबूर हो रहे हैं, जो मानव-वन्यजीव संघर्ष को और बढ़ा सकता है।

आर्थिक संबंध:

  • किसानों पर प्रभाव: वन्यजीवों द्वारा फसलों के नुकसान और पशुधन के नुकसान से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होता है, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित होती है। हालांकि, मुआवजा तंत्र मौजूद हैं, लेकिन वे अक्सर अपर्याप्त या विलंबित होते हैं।
  • पर्यटन पर प्रभाव: वन्यजीवों से जुड़े संघर्ष पर्यटन को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकते हैं, खासकर यदि पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ जाती हैं।
  • संरक्षण लागत: मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए विभिन्न उपायों (बाड़ लगाना, गश्त, जागरूकता कार्यक्रम) में महत्वपूर्ण वित्तीय निवेश की आवश्यकता होती है। हवाई स्थानांतरण जैसे महंगे समाधानों से इन लागतों में और वृद्धि होगी, जो सीमित वन विभाग के बजट पर बोझ डालेगा।

जूनोटिक संबंध (Zoonoses Connection):

हालाँकि हवाई स्थानांतरण सीधे तौर पर जूनोटिक रोगों से संबंधित नहीं है, लेकिन मानव-वन्यजीव संघर्ष और मानव-वन्यजीव इंटरफ़ेस (Interface) में वृद्धि जूनोटिक रोगों के प्रसार के जोखिम को बढ़ाती है। जंगली जानवरों के साथ सीधा या अप्रत्यक्ष संपर्क मनुष्यों में बीमारियों के संचरण का एक अवसर पैदा करता है। इसलिए, संघर्ष को कम करने के समग्र प्रयासों में, जूनोटिक जोखिमों को कम करना भी एक महत्वपूर्ण विचार होना चाहिए।

1 प्रैक्टिस प्रीलिम्स MCQ

प्रश्न: भारत में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत, बाघ और तेंदुआ जैसे जानवर किस अनुसूची में शामिल हैं, जो उन्हें उच्चतम स्तर की सुरक्षा प्रदान करती है?

A. अनुसूची-II

B. अनुसूची-III

C. अनुसूची-I

D. अनुसूची-IV

उत्तर: C

व्याख्या: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में वे वन्यजीव शामिल हैं जिन्हें उच्चतम स्तर की सुरक्षा प्राप्त है और जिनके शिकार, व्यापार या उन्हें परेशान करने पर सबसे कड़े दंड का प्रावधान है। बाघ और तेंदुआ इस अनुसूची के अंतर्गत आते हैं।

1 प्रैक्टिस मेन्स वर्णनात्मक प्रश्न

प्रश्न: “केरल वन विभाग द्वारा मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए हेलीकॉप्टर का उपयोग करके अनुसूची-I जानवरों के स्थानांतरण का प्रस्ताव पारिस्थितिक और आर्थिक व्यवहार्यता दोनों के दृष्टिकोण से एक जटिल मुद्दा है। विश्लेषण करें और ऐसे संघर्षों को कम करने के लिए वैकल्पिक रणनीतियों पर चर्चा करें।” (लगभग 250 शब्द)

मॉडल उत्तर के बिंदु:

परिचय: मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती समस्या को संक्षेप में बताएं और केरल के हेलीकॉप्टर स्थानांतरण प्रस्ताव का उल्लेख करें, इसे एक जटिल समाधान के रूप में प्रस्तुत करें।

पारिस्थितिक व्यवहार्यता का विश्लेषण:

  • जानवरों पर अत्यधिक तनाव, चोट का जोखिम, स्थानांतरण के बाद अनुकूलन में कठिनाई और उच्च मृत्यु दर की संभावना को उजागर करें।
  • नए पारिस्थितिकी तंत्र पर संभावित नकारात्मक प्रभावों, जैसे शिकार आधार पर दबाव या मौजूदा वन्यजीवों के साथ प्रतिस्पर्धा, पर चर्चा करें।
  • बताएं कि यह समाधान वन्यजीवों के दीर्घकालिक कल्याण और संरक्षण लक्ष्यों के लिए कितना उपयुक्त है।

आर्थिक व्यवहार्यता का विश्लेषण:

  • भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टरों के संचालन की अत्यधिक लागत (ईंधन, रखरखाव, कर्मियों) पर प्रकाश डालें।
  • सवाल उठाएं कि क्या यह सीमित संसाधनों का सबसे कुशल उपयोग है और क्या यह एक स्थायी समाधान हो सकता है।
  • दीर्घकालिक लागत-लाभ विश्लेषण की आवश्यकता पर बल दें।

वैकल्पिक रणनीतियाँ:

  • आवास प्रबंधन और सुधार: वन्यजीव गलियारों का निर्माण/पुनर्स्थापना, वनीकरण, घास के मैदानों का विकास, और वन संसाधनों का सतत प्रबंधन ताकि वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवासों में पर्याप्त भोजन और आश्रय मिल सके।
  • समुदाय आधारित संरक्षण: स्थानीय समुदायों को वन्यजीव संरक्षण प्रयासों में शामिल करना, जागरूकता कार्यक्रम चलाना, स्वैच्छिक पुनर्वास विकल्प प्रदान करना।
  • त्वरित और पर्याप्त मुआवजा: वन्यजीवों द्वारा हुए नुकसान के लिए त्वरित और पर्याप्त मुआवजा प्रदान करना ताकि स्थानीय लोगों में शत्रुता कम हो।
  • प्रौद्योगिकी का उपयोग: बाड़ लगाना (सौर ऊर्जा से चलने वाली बाड़), प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, जीपीएस ट्रैकिंग, और निगरानी के लिए ड्रोन का उपयोग।
  • वैज्ञानिक अनुसंधान और निगरानी: वन्यजीवों की आबादी, व्यवहार और संघर्ष पैटर्न को समझने के लिए निरंतर अनुसंधान और डेटा संग्रह।
  • अपशिष्ट प्रबंधन: मानव बस्तियों के पास भोजन के स्रोतों को हटाने के लिए प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन, जो जानवरों को आकर्षित कर सकते हैं।
  • क्षमता निर्माण: वन विभाग के कर्मियों और स्थानीय लोगों को संघर्ष प्रबंधन तकनीकों में प्रशिक्षित करना।

निष्कर्ष: हेलीकॉप्टर स्थानांतरण जैसे अत्यधिक समाधानों के बजाय, मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए एक समग्र, बहु-आयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है जो संघर्ष के मूल कारणों को संबोधित करे, समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करे, और पारिस्थितिक और आर्थिक रूप से व्यवहार्य हो।


यह अध्ययन नोट IAS EasyWay की दैनिक समसामयिकी पहल का एक हिस्सा है। ऐसे ही अधिक दैनिक समसामयिकी और अध्ययन सामग्री के लिए IAS EasyWay पर निरंतर आते रहें।

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