Dedicated Freight Corridors (DFCs) & PM Gati Shakti (July 06, 2026) – दैनिक समसामयिकी विश्लेषण

दिनांक: 06 जुलाई, 2026

भूमिका और समसामयिक संदर्भ (Introduction & Current Context)

क्या आप जानते हैं कि भारत को वैश्विक विनिर्माण (manufacturing) की नई महाशक्ति बनने से कौन सी बड़ी चुनौती रोक रही है? वह है हमारी भारी-भरकम लॉजिस्टिक्स लागत, जो वर्तमान में देश की जीडीपी का लगभग 13-14% है। सरकार ने इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने समर्पित माल गलियारों (DFCs) और पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (PM Gati Shakti NMP) को आपस में जोड़ दिया है।

जुलाई 2026 के ताज़ा आधिकारिक आंकड़े एक बड़ी सफलता दर्शाते हैं। पूर्वी समर्पित माल गलियारे (EDFC) और पश्चिमी समर्पित माल गलियारे (WDFC) के पूरी तरह चालू होने से भारतीय रेलवे की माल ढोने की क्षमता और काम करने की रफ्तार में बड़ा सुधार आया है। पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म के जरिए इन गलियारों को औद्योगिक क्षेत्रों, आर्थिक क्षेत्रों और बंदरगाहों से सीधे जोड़ा गया है। इस आपसी तालमेल ने देश में व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) को एक नया स्तर दिया है। आज जब वैश्विक कंपनियां चीन के विकल्प के रूप में ‘चीन-प्लस-वन’ (China-Plus-One) नीति अपना रही हैं, तब भारत के पास निवेश आकर्षित करने का यह बेहतरीन मौका है। इसके लिए हमें अपनी लॉजिस्टिक्स लागत को घटाकर वैश्विक स्तर (8-9%) पर लाने की तत्काल आवश्यकता है, और यह एकीकरण इसी दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।

पाठ्यक्रम प्रासंगिकता (Syllabus Relevance)

सिविल सेवा मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए आपको इस विषय को पाठ्यक्रम के इन महत्वपूर्ण हिस्सों से जोड़कर पढ़ना चाहिए:

प्रश्न पत्र (Paper) महत्वपूर्ण पाठ्यक्रम विषय (Syllabus Topics)
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-III (GS Paper III) बुनियादी ढांचा (Infrastructure): रेलवे, बंदरगाह, सड़क, ऊर्जा; निवेश मॉडल; भारतीय अर्थव्यवस्था तथा नियोजन, विकास, विकास दर और रोजगार से संबंधित मुद्दे।
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-II (GS Paper II) सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप: विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकारी प्रयास, उनके अभिकल्पन (design) और कार्यान्वयन के मुद्दे; वैधानिक, नियामक और विभिन्न अर्ध-न्यायिक निकाय; सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) और केंद्र-राज्य प्रशासनिक समन्वय।

समर्पित माल गलियारे (DFCs): एक विहंगम दृष्टि (Dedicated Freight Corridors: An Overview)

इसे समझने के लिए एक आसान उदाहरण लें। मान लीजिए कि आपको एक ही सड़क पर साइकिल भी चलानी है और उसी पर भारी-भरकम ट्रक भी। नतीजा क्या होगा? दोनों की रफ्तार धीमी हो जाएगी। भारत के पुराने रेल नेटवर्क के साथ भी यही हो रहा था। एक ही पटरी पर तेज़ रफ्तार राजधानी एक्सप्रेस भी चलती थी और भारी मालगाड़ी भी। प्राथमिकता हमेशा यात्री ट्रेनों को मिलती थी, जिससे मालगाड़ियों की औसत गति सिमटकर सिर्फ 25 किमी/घंटा रह जाती थी। माल समय पर न पहुँचने से व्यापारियों को भारी नुकसान होता था।

इसी समस्या को हल करने के लिए सरकार ने ‘डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड’ (DFCCIL) की स्थापना की। इसका काम था—केवल मालगाड़ियों के लिए अलग से विशेष पटरियों का जाल बिछाना। आइए इन दोनों मुख्य कॉरिडोर को समझें:

1. पूर्वी समर्पित माल गलियारा (EDFC): यह गलियारा लगभग 1,337 किलोमीटर लंबा है। यह पंजाब के साहनेवाल (लुधियाना) से शुरू होता है और हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड से गुज़रते हुए पश्चिम बंगाल के दानकुनी पर समाप्त होता है। कोयला खदानों, बड़े इस्पात संयंत्रों और प्रमुख कृषि क्षेत्रों को आपस में जोड़ने के कारण यह देश के विकास की रीढ़ है। विश्व बैंक (World Bank) इस कॉरिडोर को वित्तीय मदद दे रहा है।

2. पश्चिमी समर्पित माल गलियारा (WDFC): यह कॉरिडोर लगभग 1,506 किलोमीटर लंबा है। यह उत्तर प्रदेश के दादरी को हरियाणा, राजस्थान और गुजरात से जोड़ते हुए सीधे मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (JNPT) से मिलाता है। यह उत्तर भारत के भीतरी औद्योगिक क्षेत्रों (Hinterlands) को देश के पश्चिमी तट पर बने बड़े बंदरगाहों (जैसे मुंद्रा, कांडला, पिपावाव) से सीधे जोड़ता है। इस परियोजना के लिए जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) ने वित्तीय सहायता दी है।

पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान: एकीकृत नियोजन का उत्प्रेरक (PM Gati Shakti: Catalyst for Integrated Planning)

क्या आपने कभी अपने शहर में ऐसा देखा है कि नगर निगम ने एक शानदार नई सड़क बनाई, और अगले ही हफ्ते टेलीफोन कंपनी या गैस पाइपलाइन बिछाने वाले विभाग ने उसे दोबारा खोद दिया? विभागों के अलग-अलग (silos में) काम करने के कारण जनता के पैसे और समय की भारी बर्बादी होती थी। सरकार ने अक्टूबर 2021 में इस अव्यवस्था को रोकने के लिए ‘पीएम गति शक्ति’ की शुरुआत की।

यह योजना बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के एकीकृत नियोजन (integrated planning) के लिए एक अत्याधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म है। यह 16 से अधिक मंत्रालयों और विभागों के डेटा को एक साझा भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) प्लेटफॉर्म पर लाती है। इसे एक साझा डिजिटल मानचित्र समझें, जहाँ हर विभाग को पता होता है कि दूसरा विभाग कहाँ और क्या काम कर रहा है।

यह मास्टर प्लान निम्नलिखित छह बुनियादी स्तंभों पर खड़ा है:

  • व्यापकता (Comprehensiveness): देश भर की सभी मौजूदा और आगामी परियोजनाओं का एक ही जगह पूरा डेटाबेस उपलब्ध है।
  • प्राथमिकता (Prioritization): सभी विभाग एक साथ बैठकर तय करते हैं कि कौन सा प्रोजेक्ट पहले पूरा किया जाना चाहिए।
  • इष्टतमकरण (Optimization): यह सिस्टम विभिन्न मार्गों का विश्लेषण करके माल परिवहन के लिए सबसे सस्ता और तेज़ रास्ता चुनता है।
  • तुल्यकालन (Synchronization): यह अलग-अलग मंत्रालयों के काम करने के समय का तालमेल बनाता है ताकि एक विभाग का काम दूसरे के लिए रुकावट न बने।
  • विश्लेषणात्मक (Analytical): 200 से अधिक डेटा लेयर्स वाले जीआईएस आधारित स्थानिक नियोजन (spatial planning) टूल की मदद से पूरी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो जाती है।
  • गतिशीलता (Dynamic): उपग्रह चित्रों (satellite imagery) और लाइव डेटा के ज़रिए परियोजनाओं की ज़मीनी प्रगति पर पल-पल नज़र रखी जाती है।

डीएफसी और पीएम गति शक्ति का एकीकरण: एक बल गुणक (Synergy as a Force Multiplier)

जब हम समर्पित माल गलियारों को गति शक्ति के डिजिटल दिमाग के साथ जोड़ते हैं, तो देश की अर्थव्यवस्था को एक नया संवेग मिलता है। इस एकीकरण ने देश के लॉजिस्टिक्स परिदृश्य को निम्नलिखित तीन मुख्य तरीकों से बदल दिया है:

पहला, बहु-साधन एकीकरण (Multi-modal Integration): सरकार गति शक्ति के तहत डीएफसी के माल टर्मिनलों को राष्ट्रीय राजमार्गों, अंतर्देशीय जलमार्गों और हवाई अड्डों से सीधे जोड़ रही है, जिससे शुरुआती मील (first-mile) और अंतिम मील (last-mile) की कनेक्टिविटी का मसला हल होता है।

दूसरा, आर्थिक क्षेत्रों का रणनीतिक विकास: सरकार ने दादरी-नोएडा-गाजियाबाद निवेश क्षेत्रों और गुजरात के विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZs) को सीधे पश्चिमी समर्पित माल गलियारे (WDFC) के मुहाने पर बसाया है। इससे उत्पाद बनते ही सीधे ट्रेनों पर लदकर बंदरगाहों तक पहुँच जाते हैं।

तीसरा, त्वरित सरकारी मंजूरियाँ: गति शक्ति पोर्टल पर सभी भौगोलिक नक्शे पहले से उपलब्ध हैं। जब कोई नई पटरी बिछानी होती है, तो वन विभाग, पर्यावरण मंत्रालय और स्थानीय प्राधिकरणों से एनओसी (NOC) मिलने का समय बहुत कम हो जाता है। फाइलें हफ़्तों लटकी नहीं रहतीं, बल्कि डिजिटल रूप से तुरंत मंजूर हो जाती हैं।

संरचनात्मक और प्रशासनिक चुनौतियाँ (Structural & Administrative Challenges)

यूपीएससी और एमपीएससी जैसी कठिन परीक्षाओं की तैयारी में आपको केवल सरकारी योजनाओं की तारीफ ही नहीं करनी है, बल्कि उनकी कमियों का भी वस्तुनिष्ठ विश्लेषण करना होगा। धरातल पर अभी भी कुछ बड़ी चुनौतियाँ मौजूद हैं:

  • भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास (Land Acquisition & Rehabilitation): भारत में ज़मीन खरीदना आज भी एक बड़ी सिरदर्दी है। उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे अत्यधिक घने बसे राज्यों में मुआवज़े को लेकर अक्सर स्थानीय विवाद अदालतों में पहुँच जाते हैं, जिससे परियोजनाएँ महीनों तक लटक जाती हैं।
  • सहकारी संघवाद की सीमाएं (Limitations of Cooperative Federalism): केंद्र ने सभी राज्यों को गति शक्ति पोर्टल पर अपनी डेटा परतें (data layers) जोड़ने को कहा है। कुछ राज्य सरकारों के पास इस डिजिटल बुनियादी ढांचे को संभालने के लिए न तो कुशल इंजीनियर हैं और न ही पर्याप्त तकनीकी संसाधन। कभी-कभी केंद्र और राज्यों के बीच राजनीतिक असहमतियाँ भी इस समन्वय में बाधा डालती हैं।
  • पूंजी का अभाव और बढ़ता ऋण भार (Financial Challenges & Debt Burden): इन विशाल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को पूरा होने और मुनाफ़ा देने में कई साल (Long Gestation Period) लग जाते हैं। निजी कंपनियाँ इतना लंबा जोखिम लेने से घबराती हैं, जिससे सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल उम्मीद के मुताबिक सफल नहीं हो पाए हैं। नतीजतन, सरकार को स्वयं कर्ज़ और बजटीय आवंटन पर निर्भर रहना पड़ता है।
  • अंतिम छोर की कमियाँ (Inadequate Last-Mile Infrastructure): रेलवे स्टेशनों से स्थानीय कारखानों या गोदामों तक जोड़ने वाली सड़कें अक्सर संकरी और जर्जर होती हैं। इससे माल उतारने और चढ़ाने में बहुत अधिक समय लगता है। यह देरी डीएफसी की सुपरफास्ट स्पीड से मिले फायदे को काफी हद तक कम कर देती है।

संवैधानिक और संस्थागत पहलू का विश्लेषण (Constitutional and Institutional Analysis)

जब आप मुख्य परीक्षा में उत्तर लिखेंगे, तो इन संवैधानिक और संस्थागत पहलुओं को शामिल करने से आपको अन्य उम्मीदवारों पर बढ़त मिलेगी:

  • सातवीं अनुसूची (Seventh Schedule) का संवैधानिक पेंच: हमारे संविधान की सातवीं अनुसूची में शक्तियों का जो बंटवारा है, उसे ध्यान से देखिए। ‘रेलवे’ संघ सूची (Union List – प्रविष्टि 22) का विषय है, जबकि ‘जमीन’ (प्रविष्टि 18) और ‘सड़कें’ (प्रविष्टि 13, राष्ट्रीय राजमार्गों को छोड़कर) राज्य सूची (State List) के अंतर्गत आती हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि केंद्र सरकार राज्यों के पूर्ण सहयोग के बिना एक इंच रेल लाइन भी नहीं बिछा सकती। इसलिए सहकारी संघवाद यहाँ केवल एक सैद्धांतिक विचार नहीं, बल्कि एक प्रशासनिक आवश्यकता है।
  • गति शक्ति का मजबूत संस्थागत ढांचा: इस मास्टर प्लान को ज़मीन पर उतारने के लिए सरकार ने तीन स्तरों वाली एक प्रशासनिक व्यवस्था तैयार की है:
    • सचिवों का अधिकार प्राप्त समूह (EGoS): कैबिनेट सचिव इस समूह की अध्यक्षता करते हैं। यह समूह नीतिगत फैसले लेता है और प्रगति की निगरानी करता है।
    • नेटवर्क规划 (Network Planning Group – NPG): इसमें संबंधित मंत्रालयों के योजना प्रमुख होते हैं। यह समूह किसी भी नई परियोजना की तकनीकी और आर्थिक व्यवहार्यता का परीक्षण करता है।
    • तकनीकी सहायता इकाई (TSU): विशेषज्ञों की यह टीम परियोजनाओं की वास्तविक जीआईएस मैपिंग और डेटा विश्लेषण करती है।

पर्यावरणीय एवं आर्थिक अंतर्संबंध: हरित परिवहन की ओर कदम (Environmental & Economic Connection: Shift to Green Transport)

इस परियोजना का महत्व केवल आर्थिक नहीं है, बल्कि यह हमारे पर्यावरण से भी गहराई से जुड़ा है:

  • डीकार्बोनाइजेशन (Decarbonization): भारत में परिवहन क्षेत्र से होने वाले कुल कार्बन उत्सर्जन का 90% से अधिक हिस्सा सड़क परिवहन (ट्रकों आदि) से आता है। इसके विपरीत, रेल परिवहन प्रति टन माल ढोने में सड़क के मुकाबले 80% कम कार्बन उत्सर्जित करता है। डीएफसी गलियारे पूरी तरह से बिजली से चलते हैं, जिससे भारी मात्रा में डीजल की बचत होती है। यह भारत के पेरिस समझौते के तहत राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) और साल 2070 तक ‘नेट-जीरो’ (Net-Zero) उत्सर्जन के संकल्प को पूरा करने में बड़ी भूमिका निभा रहा है।
  • लॉजिस्टिक्स लागत में भारी गिरावट: वर्तमान में हमारी लॉजिस्टिक्स लागत जीडीपी का लगभग 13-14% है। इसके विपरीत, अमेरिका और यूरोप में यह आंकड़ा सिर्फ 8-9% है। डीएफसी के ज़रिए कोयला, सीमेंट, अनाज और कंटेनरों की तेज़ आवाजाही से माल ढुलाई सस्ती होगी। इससे अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भारतीय सामानों की कीमतें प्रतिस्पर्धी बनेंगी और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।

प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न (Practice Prelims MCQ)

प्रश्न. समर्पित माल गलियारों (DFCs) और पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. पूर्वी समर्पित माल गलियारा (EDFC) मुख्य रूप से जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) द्वारा वित्तपोषित है, जबकि पश्चिमी समर्पित माल गलियारा (WDFC) को विश्व बैंक द्वारा सहायता प्राप्त है।
  2. पीएम गति शक्ति संस्थागत ढांचे के अंतर्गत ‘सचिवों का अधिकार प्राप्त समूह’ (EGoS) की अध्यक्षता नीति आयोग के उपाध्यक्ष द्वारा की जाती है।
  3. भारतीय संविधान के तहत, रेलवे संघ सूची का विषय है, जबकि भूमि राज्य सूची का विषय है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 3
(C) केवल 2 और 3
(D) 1, 2 और 3
उत्तर: (B)
व्याख्या:
कथन 1 गलत है: पूर्वी समर्पित माल गलियारा (EDFC) को मुख्य रूप से विश्व बैंक ने वित्तपोषित किया है, जबकि पश्चिमी समर्पित माल गलियारा (WDFC) को जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) वित्तीय सहायता दे रही है।
कथन 2 गलत है: पीएम गति शक्ति के अंतर्गत गठित ‘सचिवों के अधिकार प्राप्त समूह’ (EGoS) की कमान देश के कैबिनेट सचिव (Cabinet Secretary) के हाथों में होती है, न कि नीति आयोग के उपाध्यक्ष के पास।
कथन 3 सही है: भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत रेलवे संघ सूची (प्रविष्टि 22) का हिस्सा है और भूमि राज्य सूची (प्रविष्टि 18) का हिस्सा है।
इस प्रकार, केवल कथन 3 सही है। अतः सही विकल्प (B) है।

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न (Practice Mains Descriptive Question)

प्रश्न: “पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के साथ समर्पित माल गलियारों (DFCs) का एकीकरण भारत की लॉजिस्टिक्स अक्षमताओं को दूर करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।” इस संदर्भ में, इस एकीकरण के महत्व का विश्लेषण कीजिए तथा इसके सफल क्रियान्वयन के मार्ग में आने वाली प्रशासनिक और ढांचागत चुनौतियों की विवेचना कीजिए। (250 शब्द, 15 अंक)

मॉडल उत्तर के मुख्य बिंदु (Model Answer Key Points):

भूमिका (Introduction):

  • आप उत्तर की शुरुआत में भारत के वर्तमान लॉजिस्टिक्स परिदृश्य का परिचय दें, जहाँ लागत जीडीपी की 13-14% है (जो वैश्विक औसत 8-9% से काफी अधिक है)।
  • इसके बाद, समर्पित माल गलियारों (EDFC और WDFC) और पीएम गति शक्ति के एकीकरण को इस लागत को कम करने और दक्षता बढ़ाने के एक सशक्त समाधान के रूप में प्रस्तुत करें।

एकीकरण का महत्व (Significance of Integration):

  • बहु-साधन (Multi-modal) दक्षता: रेल, सड़क, बंदरगाहों और नागरिक उड्डयन के बीच बेहतरीन तालमेल बनाकर माल ढुलाई के समय में कमी लाना।
  • आर्थिक गलियारों का विकास: डीएफसी के निकट आर्थिक क्षेत्रों (जैसे दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर) को गति शक्ति के माध्यम से बुनियादी ढांचागत सहायता प्रदान करना।
  • पर्यावरणीय स्थिरता: सड़क परिवहन से माल ढुलाई को रेल परिवहन की ओर मोड़कर कार्बन उत्सर्जन को कम (डीकार्बोनाइजेशन) करना।
  • निवेश को बढ़ावा: पारदर्शी डिजिटल डेटा और तेज़ी से मिलने वाली मंजूरियों से ‘इज ऑफ डूइंग बिजनेस’ में सुधार करना, जिससे वैश्विक निवेश भारत आ सके।

प्रमुख प्रशासनिक और ढांचागत चुनौतियाँ (Key Challenges):

  • भूमि अधिग्रहण की जटिलता: भूमि राज्य सूची का विषय होने के कारण अलग-अलग राज्यों में स्थानीय स्तर पर विरोध और अदालती मुकदमों के चलते काम में देरी होना।
  • वित्तीय जोखिम: इन बड़ी परियोजनाओं में निवेश वापस आने का समय (Gestation Period) बहुत लंबा होता है। इस वजह से निजी निवेशक भागीदारी करने से बचते हैं, जिससे सारा बोझ सरकारी खजाने पर पड़ता है।
  • तकनीकी और संस्थागत अंतर: कई राज्यों और स्थानीय निकायों के पास गति शक्ति पोर्टल के इस्तेमाल के लिए आवश्यक कुशल कर्मचारी और डिजिटल संसाधन नहीं हैं।
  • अंतिम छोर की कनेक्टिविटी (Last-Mile Connectivity): डीएफसी टर्मिनलों से फैक्ट्रियों तक जोड़ने वाली सड़कों का संकरा और जर्जर होना, जिससे माल चढ़ाने-उतारने में अधिक समय खर्च होना।

आगे की राह (Way Forward):

  • सहकारी संघवाद को बढ़ावा: राज्यों को गति शक्ति के नियमों को अपनाने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन (जैसे ब्याज मुक्त ऋण) देना।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) का पुनरुद्धार: जोखिम-साझाकरण के नियमों को आसान बनाकर निजी निवेशकों का भरोसा जीतना।
  • फीडर नेटवर्क का तेज़ी से विकास: रेलवे टर्मिनलों के निकट मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क (MMLPs) बनाना और अंतिम छोर की सड़कों को चौड़ा करना।

निष्कर्ष (Conclusion):

  • संक्षेप में कहें तो, डीएफसी और पीएम गति शक्ति का यह अनूठा संगम न केवल देश के परिवहन ढांचे को सुधारेगा, बल्कि भारत को एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने और ‘विकसित भारत @2047’ के हमारे बड़े सपने को साकार करने में एक इंजन का काम करेगा।

यह अध्ययन नोट IAS EasyWay की दैनिक समसामयिकी पहल का एक हिस्सा है।


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लेखिका के बारे में: भाग्यश्री (Bhagyashri)

भाग्यश्री एक वरिष्ठ सिविल सेवा मेंटर और शिक्षिका हैं, जिन्हें UPSC और MPSC उम्मीदवारों का मार्गदर्शन करने का 8 से अधिक वर्षों का अनुभव है। कई बार सिविल सेवा मुख्य परीक्षा (Mains) उत्तीर्ण करने और सैकड़ों सफल प्रशासनिक अधिकारियों को प्रशिक्षित करने के बाद, वे जटिल सामान्य अध्ययन (GS) पाठ्यक्रम और CSAT रणनीतियों को व्यावहारिक अध्ययन ढाँचे में बदलने में महारत रखती हैं।

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