डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFCs) और पीएम गति शक्ति: भारत के लॉजिस्टिक्स परिदृश्य में युगांतरकारी परिवर्तन

दिनांक: 06 जुलाई, 2026

भूमिका और समसामयिक संदर्भ (Introduction & Current Context)

भारत सरकार के महत्वाकांक्षी ढांचागत विकास कार्यक्रमों के हिस्से के रूप में, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFCs) और पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (PM Gati Shakti NMP) के बीच बढ़ते समन्वय ने देश के लॉजिस्टिक्स और विनिर्माण क्षेत्र को एक नई दिशा प्रदान की है। जुलाई 2026 के हालिया आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पूर्वी समर्पित माल गलियारे (EDFC) और पश्चिमी समर्पित माल गलियारे (WDFC) के पूर्ण परिचालन में आने के बाद से, भारतीय रेलवे की माल ढुलाई क्षमता और परिचालन दक्षता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। पीएम गति शक्ति मंच के माध्यम से इन गलियारों को औद्योगिक क्षेत्रों, आर्थिक क्षेत्रों और बंदरगाहों से जोड़ने के समन्वित प्रयासों ने देश में व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) को अभूतपूर्व बढ़ावा दिया है। वर्तमान में, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) में चीन-प्लस-वन (China-Plus-One) नीति के तहत बड़े विनिर्माण निवेश को आकर्षित करने के लिए भारत को अपनी लॉजिस्टिक्स लागत को वैश्विक मानकों (जीडीपी के 8-9%) के अनुरूप लाने की तत्काल आवश्यकता है, जिसमें यह एकीकरण एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रहा है।

पाठ्यक्रम प्रासंगिकता (Syllabus Relevance)

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के दृष्टिकोण से यह विषय निम्नलिखित शीर्षकों के अंतर्गत अत्यंत महत्वपूर्ण है:

  • सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-III (GS Paper III): बुनियादी ढांचा (Infrastructure) – रेलवे, बंदरगाह, सड़क, ऊर्जा; निवेश मॉडल; भारतीय अर्थव्यवस्था तथा नियोजन, विकास, विकास दर और रोजगार से संबंधित मुद्दे।
  • सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-II (GS Paper II): सरकारी नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न होने वाले मुद्दे; वैधानिक, नियामक और विभिन्न अर्ध-न्यायिक निकाय; सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) और केंद्र-राज्य प्रशासनिक समन्वय।

समर्पित माल गलियारे (DFCs): एक विहंगम दृष्टि (Dedicated Freight Corridors: An Overview)

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना भारत की अब तक की सबसे बड़ी रेल अवसंरचना परियोजनाओं में से एक है। पारंपरिक भारतीय रेलवे नेटवर्क पर यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों दोनों का संचालन एक ही ट्रैक पर होने के कारण मालगाड़ियों की गति अत्यधिक धीमी (लगभग 25 किमी/घंटा) रहती थी और यात्री ट्रेनों को प्राथमिकता दिए जाने के कारण माल ढुलाई में अत्यधिक विलंब होता था। इस समस्या के समाधान के लिए ‘डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड’ (DFCCIL) की स्थापना की गई ताकि केवल माल ढुलाई के लिए समर्पित समानांतर पटरियों का निर्माण किया जा सके।

1. पूर्वी समर्पित माल गलियारा (EDFC): लगभग 1337 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर पंजाब के साहनेवाल (लुधियाना) से शुरू होकर हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड से गुजरते हुए पश्चिम बंगाल के दानकुनी तक जाता है। यह कोयला खदानों, इस्पात संयंत्रों और कृषि बेल्ट को जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण है। इसे मुख्य रूप से विश्व बैंक (World Bank) द्वारा वित्तपोषित किया गया है।

2. पश्चिमी समर्पित माल गलियारा (WDFC): लगभग 1506 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के दादरी को हरियाणा, राजस्थान, गुजरात से जोड़ते हुए महाराष्ट्र के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (JNPT), मुंबई से मिलाता है। यह कॉरिडोर भारत के पश्चिमी तट पर स्थित बंदरगाहों (जैसे मुंद्रा, कांडला, पिपावाव) को उत्तर भारत के भीतरी औद्योगिक क्षेत्रों (Hinterlands) से जोड़ता है। इसे मुख्य रूप से जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) द्वारा वित्तपोषित किया गया है।

पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान: एकीकृत नियोजन का उत्प्रेरक (PM Gati Shakti: Catalyst for Integrated Planning)

अक्टूबर 2021 में शुरू की गई ‘पीएम गति शक्ति’ योजना बुनियादी ढांचा कनेक्टिविटी परियोजनाओं के एकीकृत नियोजन और समन्वित कार्यान्वयन के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है। पूर्व में, विभिन्न बुनियादी ढांचा विभाग (जैसे सड़क, रेल, गैस पाइपलाइन, दूरसंचार) अलग-अलग कार्य करते थे, जिससे अक्सर एक विभाग द्वारा सड़क बनाने के तुरंत बाद दूसरे विभाग द्वारा केबल या पाइपलाइन बिछाने के लिए सड़क खोदने जैसी विसंगतियां सामने आती थीं।

पीएम गति शक्ति इस बिखराव (Siloed Approach) को समाप्त करने के लिए 16 से अधिक मंत्रालयों/विभागों के डेटा को एक साझा भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) प्लेटफॉर्म पर एकीकृत करती है। यह योजना निम्नलिखित छह स्तंभों (Six Pillars) पर आधारित है:

  • व्यापकता (Comprehensiveness): इसमें सभी मौजूदा और नियोजित पहलों का एक केंद्रीकृत डेटाबेस शामिल है।
  • प्राथमिकता (Prioritization): विभिन्न विभाग इसके माध्यम से परियोजनाओं को प्राथमिकता दे सकते हैं।
  • इष्टतमकरण (Optimization): यह माल परिवहन के लिए सबसे सस्ते और सबसे तेज़ मार्ग की पहचान करने में मदद करता है।
  • तुल्यकालन (Synchronization): यह विभिन्न मंत्रालयों के बीच कार्यों के समयबद्ध समन्वय को सुनिश्चित करता है।
  • विश्लेषणात्मक (Analytical): जीआईएस-आधारित स्थानिक नियोजन उपकरण और 200+ लेयर्स के साथ यह योजना निर्माण को अधिक पारदर्शी बनाता है।
  • गतिशीलता (Dynamic): उपग्रह चित्रों और वास्तविक समय के डेटा के माध्यम से परियोजनाओं की प्रगति की निगरानी की जाती है।

डीएफसी और पीएम गति शक्ति का एकीकरण: एक बल गुणक (Synergy as a Force Multiplier)

डीएफसी और पीएम गति शक्ति के एकीकरण से कई बड़े आर्थिक सुधार देखने को मिले हैं। पहला, बहु-साधन एकीकरण (Multi-modal Integration) संभव हो सका है। डीएफसी के कार्गो टर्मिनलों को गति शक्ति के तहत राष्ट्रीय राजमार्गों, अंतर्देशीय जलमार्गों और हवाई अड्डों से सीधे जोड़ा जा रहा है, जिससे ‘फर्स्ट-माइल’ और ‘लास्ट-माइल’ कनेक्टिविटी सुनिश्चित होती है। दूसरा, औद्योगिक गलियारों (Industrial Corridors) और आर्थिक क्षेत्रों का रणनीतिक विकास हो रहा है। दादरी-नोएडा-गाजियाबाद निवेश क्षेत्र और गुजरात में विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZs) को सीधे पश्चिमी कॉरिडोर से जोड़ा गया है। तीसरा, एकीकृत योजना के कारण वन विभाग, पर्यावरण मंत्रालय और स्थानीय प्राधिकरणों से मिलने वाली मंजूरियों में लगने वाला समय काफी घट गया है क्योंकि सभी परियोजना मानचित्र गति शक्ति पोर्टल पर पहले से ही ओवरलैप करके देख लिए जाते हैं।

संरचनात्मक और प्रशासनिक चुनौतियाँ (Structural & Administrative Challenges)

इस अभूतपूर्व प्रगति के बावजूद, धरातल पर कुछ ढांचागत और संस्थागत बाधाएं अभी भी मौजूद हैं:

  • भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास (Land Acquisition & Rehabilitation): भारत में भूमि सुधारों की धीमी गति और मुकदमों के कारण रैखिक परियोजनाओं के लिए भूमि का समय पर मिलना कठिन होता है। विशेष रूप से घनी आबादी वाले राज्यों (जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल) में भूमि अधिग्रहण के मुआवजे को लेकर विवाद उत्पन्न होते रहते हैं।
  • सहकारी संघवाद की सीमाएं (Limitations of Cooperative Federalism): यद्यपि केंद्र सरकार ने राज्यों को गति शक्ति पोर्टल पर अपने डेटा लेयर्स जोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया है, लेकिन कई राज्य सरकारों के पास इस डिजिटल बुनियादी ढांचे को संचालित करने के लिए कुशल श्रमशक्ति और तकनीकी उपकरणों की कमी है। इसके अतिरिक्त, राजनीतिक प्राथमिकताओं में अंतर के कारण केंद्र और कुछ राज्यों के बीच समन्वय में बाधा आती है।
  • वित्तीय चुनौतियाँ और ऋण भार (Financial Challenges and Debt Burden): डीएफसी जैसी पूंजी-प्रधान परियोजनाओं में निवेश पर रिटर्न मिलने में लंबा समय (Long Gestation Period) लगता है। निजी क्षेत्र द्वारा बुनियादी ढांचे के विकास में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडलों के प्रति हिचकिचाहट के कारण सरकार को ऋण और बजटीय आवंटन पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
  • अंतिम छोर की बुनियादी अवसंरचना की कमी (Inadequate Last-Mile Infrastructure): रेलवे स्टेशनों से स्थानीय कारखानों या गोदामों तक जाने वाली सड़कों की खराब स्थिति या संकीर्णता के कारण माल चढ़ाने और उतारने (Loading/Unloading) में अधिक समय लगता है, जो डीएफसी की तेज गति के लाभ को आंशिक रूप से निष्प्रभावी कर देता है।

संवैधानिक और संस्थागत पहलू का विश्लेषण (Constitutional and Institutional Analysis)

बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के सुचारू संचालन के लिए देश के संवैधानिक और प्रशासनिक ढांचे को समझना आवश्यक है:

  • सातवीं अनुसूची (Seventh Schedule) का विरोधाभास: भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत, “रेलवे” संघ सूची (प्रविष्टि 22) का हिस्सा है, जबकि “भूमि” (प्रविष्टि 18) और “सड़कें” (प्रविष्टि 13, सिवाय राष्ट्रीय राजमार्गों के) राज्य सूची का हिस्सा हैं। यह संवैधानिक विभाजन यह स्पष्ट करता है कि केंद्र सरकार राज्यों के पूर्ण सहयोग के बिना कोई भी बड़ा रेल कॉरिडोर या औद्योगिक क्षेत्र विकसित नहीं कर सकती। अतः सहकारी संघवाद केवल एक आदर्श नहीं बल्कि एक प्रशासनिक अनिवार्यता है।
  • गति शक्ति संस्थागत ढांचा (Institutional Structure): योजना की प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए एक त्रि-स्तरीय संस्थागत प्रणाली बनाई गई है:
    • सचिवों का अधिकार प्राप्त समूह (EGoS): कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में यह समूह समग्र प्रगति की समीक्षा करता है और नीतिगत बदलावों की सिफारिश करता है।
    • नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (NPG): इसमें संबंधित मंत्रालयों के योजना विभागों के प्रमुख शामिल होते हैं जो तकनीकी व्यवहार्यता की जांच करते हैं।
    • तकनीकी सहायता इकाई (TSU): यह राष्ट्रीय अन्वेषक (National Investigator) और विशेषज्ञों की एक टीम है जो परियोजनाओं की जीआईएस मैपिंग और डेटा विश्लेषण करती है।

पर्यावरणीय एवं आर्थिक अंतर्संबंध: हरित परिवहन की ओर कदम (Environmental & Economic Connection: Shift to Green Transport)

परिवहन क्षेत्र भारत में ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन के मुख्य स्रोतों में से एक है, जिसमें सड़क परिवहन की हिस्सेदारी 90% से अधिक है।

  • डीकार्बोनाइजेशन (Decarbonization): रेलवे द्वारा प्रति टन-किलोमीटर माल ढुलाई में सड़क परिवहन की तुलना में लगभग 80% कम कार्बन उत्सर्जन होता है। डीएफसी गलियारे पूरी तरह से बिजली से चलते हैं, जिससे जीवाश्म ईंधन (डीजल) की खपत में भारी कमी आती है। यह भारत के पेरिस समझौते (Paris Agreement) के तहत राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) और 2070 तक शुद्ध-शून्य (Net-Zero) उत्सर्जन प्राप्त करने के संकल्प के अनुकूल है।
  • रसद लागत में कमी (Reduction in Logistics Cost): वर्तमान में भारत में लॉजिस्टिक्स लागत जीडीपी का लगभग 13-14% है, जबकि अमेरिका और यूरोप में यह 8-9% और चीन में लगभग 14-15% है। डीएफसी के माध्यम से कोयला, सीमेंट, खाद्यान्न और कंटेनरों की त्वरित ढुलाई से औद्योगिक उत्पादकता बढ़ेगी और वैश्विक व्यापार में भारतीय वस्तुओं की मूल्य प्रतिस्पर्धात्मकता (Price Competitiveness) में वृद्धि होगी।

प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न (Practice Prelims MCQ)

प्रश्न. समर्पित माल गलियारों (DFCs) और पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पूर्वी समर्पित माल गलियारा (EDFC) मुख्य रूप से जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) द्वारा वित्तपोषित है, जबकि पश्चिमी समर्पित माल गलियारा (WDFC) को विश्व बैंक द्वारा सहायता प्राप्त है।
2. पीएम गति शक्ति संस्थागत ढांचे के अंतर्गत ‘सचिवों का अधिकार प्राप्त समूह’ (EGoS) की अध्यक्षता नीति आयोग के उपाध्यक्ष द्वारा की जाती है।
3. भारतीय संविधान के तहत, रेलवे संघ सूची का विषय है, जबकि भूमि राज्य सूची का विषय है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 3
(C) केवल 2 और 3
(D) 1, 2 और 3

उत्तर: (B)
व्याख्या:
कथन 1 गलत है। पूर्वी समर्पित माल गलियारा (EDFC) को मुख्य रूप से विश्व बैंक द्वारा वित्तपोषित किया गया है, जबकि पश्चिमी समर्पित माल गलियारा (WDFC) को जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) द्वारा वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।
कथन 2 गलत है। पीएम गति शक्ति के अंतर्गत गठित ‘सचिवों के अधिकार प्राप्त समूह’ (EGoS) की अध्यक्षता देश के कैबिनेट सचिव (Cabinet Secretary) द्वारा की जाती है, न कि नीति आयोग के उपाध्यक्ष द्वारा।
कथन 3 सही है। भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत रेलवे संघ सूची (प्रविष्टि 22) का विषय है और भूमि राज्य सूची (प्रविष्टि 18) का विषय है।
अतः केवल कथन 3 सही होने के कारण विकल्प (B) सही उत्तर है।

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न (Practice Mains Descriptive Question)

प्रश्न. “पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के साथ समर्पित माल गलियारों (DFCs) का एकीकरण भारत की लॉजिस्टिक्स अक्षमताओं को दूर करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।” इस संदर्भ में, इस एकीकरण के महत्व का विश्लेषण कीजिए तथा इसके सफल क्रियान्वयन के मार्ग में आने वाली प्रशासनिक और ढांचागत चुनौतियों की विवेचना कीजिए। (250 शब्द, 15 अंक)

मॉडल उत्तर के मुख्य बिंदु (Model Answer Key Points):

भूमिका (Introduction):

  • भारत में वर्तमान लॉजिस्टिक्स परिदृश्य की संक्षिप्त चर्चा करें, जहां लागत जीडीपी की 13-14% है, जो वैश्विक औसत (8-9%) से अधिक है।
  • समर्पित माल गलियारों (EDFC और WDFC) और पीएम गति शक्ति के एकीकरण को इस लागत को कम करने और दक्षता बढ़ाने के साधन के रूप में परिभाषित करें।

एकीकरण का महत्व (Significance of Integration):

  • बहु-साधन (Multi-modal) दक्षता: रेल, सड़क, बंदरगाहों और नागरिक उड्डयन के बीच समन्वय स्थापित कर पारगमन समय को कम करना।
  • औद्योगिक गलियारों का विकास: डीएफसी के किनारे स्थित आर्थिक क्षेत्रों (जैसे दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर) को गति शक्ति के माध्यम से बुनियादी ढांचागत सहायता प्रदान करना।
  • पर्यावरणीय स्थिरता: सड़क परिवहन से रेल परिवहन की ओर माल ढुलाई के स्थानांतरण से कार्बन उत्सर्जन में कमी (डीकार्बोनाइजेशन) को बढ़ावा देना।
  • निवेश आकर्षण: सुव्यवस्थित मंजूरी प्रक्रिया और पारदर्शी डिजिटल डेटा के माध्यम से ‘इज ऑफ डूइंग बिजनेस’ में सुधार, जिससे घरेलू और विदेशी निवेश आकर्षित हो।

प्रमुख प्रशासनिक और ढांचागत चुनौतियाँ (Key Challenges):

  • भूमि अधिग्रहण में जटिलता: भूमि राज्य सूची का विषय होने के कारण विभिन्न राज्यों में स्थानीय स्तर पर विरोध और मुआवजा विवाद के कारण परियोजनाओं में देरी होती है।
  • वित्तीय व्यवधान: अवसंरचना परियोजनाओं की लंबी परिपक्वता अवधि (Long Gestation Period) के कारण निजी निवेशकों की कम भागीदारी और बजटीय संसाधनों पर अत्यधिक निर्भरता।
  • तकनीकी और संस्थागत अंतराल: विभिन्न राज्यों और स्थानीय निकायों के पास गति शक्ति पोर्टल के एकीकरण के लिए आवश्यक डिजिटल अवसंरचना और तकनीकी विशेषज्ञता की कमी।
  • अंतिम छोर की कनेक्टिविटी (Last-Mile Connectivity): डीएफसी स्टेशनों से औद्योगिक इकाइयों और गोदामों तक जोड़ने वाली फीडर सड़कों की अपर्याप्त क्षमता।

आगे की राह (Way Forward):

  • सहकारी संघवाद को सुदृढ़ करना: राज्यों को गति शक्ति के सिद्धांतों को अपनाने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन (जैसे ब्याज मुक्त ऋण) प्रदान करना।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) को बढ़ावा: जोखिम-साझाकरण तंत्र में सुधार करके निजी क्षेत्र के निवेश को आकर्षित करना।
  • फीडर नेटवर्क का त्वरित विकास: रेलवे टर्मिनलों के पास मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क (MMLPs) का विकास और अंतिम छोर की सड़कों का चौड़ीकरण करना।

निष्कर्ष (Conclusion):

  • निष्कर्षतः, डीएफसी और पीएम गति शक्ति का एकीकरण न केवल भारत की परिवहन व्यवस्था में सुधार करेगा, बल्कि यह भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने और ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में एक महत्वपूर्ण उत्प्रेरक सिद्ध होगा।


यह अध्ययन नोट IAS EasyWay की दैनिक समसामयिकी पहल का एक हिस्सा है।

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