दैनिक समसामयिकी विश्लेषण (Daily Current Affairs Analysis)
विषय: समर्पित माल गलियारा (DFCs) एवं पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान
दिनांक: 06 जुलाई 2026 | संबद्ध परीक्षा: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC CSE) एवं राज्य लोक सेवा आयोग (MPSC/UPPSC)
1. परिचय एवं वर्तमान संदर्भ (Introduction & Current Context)
भारत सरकार के रेल मंत्रालय एवं वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय द्वारा हाल ही में समर्पित माल गलियारे (Dedicated Freight Corridors – DFCs) के पूर्ण संचालन और पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (PM Gati Shakti NMP) के साथ इसके एकीकृत प्रदर्शन पर 06 जुलाई 2026 को एक विस्तृत समीक्षा रिपोर्ट जारी की गई है। इस रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी समर्पित माल गलियारा (EDFC – 1,875 किमी) और पश्चिमी समर्पित माल गलियारा (WDFC – 1,506 किमी) के व्यावसायिक रूप से पूर्ण कार्यशील होने के बाद भारतीय रेलवे के मुख्य passenger-cum-freight नेटवर्क पर मालगाड़ियों का दबाव 70% तक कम हो गया है। इसके अतिरिक्त, पीएम गति शक्ति के जीआईएस (Geospatial Information System) आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अंतिम मील कनेक्टिविटी (Last-mile Connectivity) को अभूतपूर्व गति से विकसित किया जा रहा है।
भारत में माल ढुलाई की लागत वर्तमान में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 13-14% है, जो वैश्विक विकसित अर्थव्यवस्थाओं (जहाँ यह 8-9% है) की तुलना में अत्यधिक उच्च है। समर्पित माल गलियारे और पीएम गति शक्ति का द्विस्तरीय मॉडल भारत की राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (National Logistics Policy – NLP) के उस लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है, जिसका उद्देश्य देश की लॉजिस्टिक्स लागत को घटाकर एकल अंक (Sub-10%) पर लाना तथा विश्व बैंक के ‘लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन सूचकांक’ (Logistics Performance Index – LPI) में भारत की वैश्विक रैंकिंग में निरंतर सुधार करना है।
2. पाठ्यक्रम संबद्धता (Syllabus Relevance)
यह विषय सिविल सेवा परीक्षा के निम्नलिखित प्रश्नपत्रों एवं खंडों के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है:
- UPSC GS Paper III (सामान्य अध्ययन – III): बुनियादी ढाँचा: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि; भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित मुद्दे; परिवहन और विपणन।
- UPSC GS Paper II (सामान्य अध्ययन – II): केंद्र एवं राज्यों द्वारा प्रदान की जाने वाली संरचनात्मक नीतियां, अंतर-मंत्रालयी समन्वय, सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism)।
- MPSC Mains GS Paper III: अवसंरचनात्मक विकास, लॉजिस्टिक्स क्षेत्र, आर्थिक सुधार एवं परिवहन प्रणाली।
3. प्रमुख बिंदु, तर्क एवं संरचनात्मक चुनौतियाँ (Key Highlights, Arguments & Structural Issues)
(A) समर्पित माल गलियारे (DFCs) की मुख्य विशेषताएं
समर्पित माल गलियारे उच्च गति और उच्च क्षमता वाले विद्युतीकृत रेलवे ट्रैक हैं, जो विशेष रूप से केवल माल ढुलाई के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। इनके प्रमुख पहलुओं में निम्नलिखित शामिल हैं:
- गति एवं क्षमता में वृद्धि: पारंपरिक पटरियों पर मालगाड़ियों की औसत गति 25 किमी/घंटा होती है, जिसे DFC पर बढ़ाकर 75 से 100 किमी/घंटा कर दिया गया है। ट्रेन की मालवहन क्षमता (Axle Load) को 22.9 टन से बढ़ाकर 25 से 32.5 टन कर दिया गया है।
- भारी और लंबी मालगाड़ियाँ (Heavy Haul Trains): DFC पर 1.5 किमी लंबी ऑटोमेटेड ‘लॉन्ग-हॉल’ और डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेनें (केवल WDFC पर) सफलतापूर्वक चलाई जा रही हैं।
- समयबद्ध वितरण (Automated Schedule Freight): माल परिवहन में अनिश्चितता को समाप्त कर ‘जस्ट-इन-टाइम’ (JIT) आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन सुनिश्चित किया गया है।
(B) संरचनात्मक चुनौतियाँ एवं बाधाएँ (Structural Issues)
व्यापक सफलताओं के बावजूद, इन परियोजनाओं के कार्यान्वयन और पूर्ण क्षमता उपयोग में निम्नलिखित संरचनात्मक बाधाएँ बनी हुई हैं:
- भूमि अधिग्रहण में विलंब एवं मुकदमों की भरमार: भारत में रैखिक बुनियादी ढांचा (Linear Infrastructure) परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 के तहत मुआवजा वितरण और भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण में विसंगतियों के कारण परियोजना समय-सीमा प्रभावित हुई है।
- अंतिम मील कनेक्टिविटी का अभाव (Last-Mile Gaps): DFC माल टर्मिनलों का औद्योगिक गलियारों, अंतर्देशीय कंटेनर डिपो (ICDs) और समुद्री बंदरगाहों के साथ पूर्ण भौतिक एकीकरण न होना एक प्रमुख बाधा रहा है, जिसे अब गति शक्ति के माध्यम से दूर किया जा रहा है।
- वित्तीय लागत वृद्धि (Cost Overruns): निर्माण में देरी, सामग्री लागत में वृद्धि और संविदात्मक विवादों के कारण परियोजना की प्रारंभिक अनुमानित लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी (PPP Model) में सुस्ती: मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्कों (MMLPs) के विकास में निजी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए स्पष्ट टैरिफ नीतियों और जोखिम-साझाकरण तंत्र की कमी रही है।
4. मुख्य अवधारणाओं एवं संवैधानिक/प्रशासनिक पहलुओं का विस्तृत विश्लेषण (Detailed Analysis of Key Terms & Constitutional Aspects)
(A) पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (PM Gati Shakti NMP)
अक्टूबर 2021 में शुरू की गई ‘पीएम गति शक्ति’ योजना बुनियादी ढांचे के विकास के लिए एक क्रांतिकारी ‘होल-ऑफ-गवर्नमेंट’ (Whole-of-Government) दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करती है। यह 16 से अधिक केंद्रीय मंत्रालयों (रेलवे, सड़क, पोत परिवहन, नागरिक उड्डयन, पेट्रोलियम आदि) को एक ही जीआईएस-आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाती है।
गति शक्ति के 6 मूल स्तंभ:
- व्यापकता (Comprehensive): सभी मौजूदा और नियोजित पहलों का एक केंद्रीकृत डेटाबेस।
- प्राथमिकता (Prioritization): अंतर-विभागीय क्रॉस-सेक्टोरल प्राथमिकताओं का निर्धारण।
- अनुकूलन (Optimization): सामान और माल की आवाजाही के लिए सबसे कुशल मार्ग चुनना।
- तुल्यकालन (Synchronization): विभिन्न मंत्रालयों के कार्यों के बीच समयबद्ध तालमेल (उदा. सड़क निर्माण के तुरंत बाद केबल बिछाने हेतु खुदाई को रोकना)।
- विश्लेषणात्मक (Analytical): भास्कराचार्य नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस एप्लिकेशंस एंड जियो-इन्फॉर्मेटिक्स (BISAG-N) द्वारा संचालित जीआईएस तकनीक से स्थानिक दृश्यता।
- गतिशील (Dynamic): उपग्रह इमेजरी के माध्यम से परियोजनाओं की वास्तविक समय (Real-time) निगरानी।
(B) संवैधानिक एवं प्रशासनिक पहलू (Constitutional & Administrative Aspects)
अवसंरचना विकास भारत के संघीय ढांचे के केंद्र में है। 7वीं अनुसूची के तहत संवैधानिक शक्तियों का विभाजन इस प्रकार है:
- संघ सूची (List I – Entry 22): रेलवे का नियंत्रण एवं संचालन पूरी तरह से केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।
- समवर्ती सूची (List III – Entry 42): राज्य और केंद्र दोनों भूमि अधिग्रहण (Acquisition and Requisitioning of Property) पर कानून बना सकते हैं।
- राज्य सूची (List II – Entry 13): राज्य की सड़कें, अंतर्देशीय जलमार्ग और स्थानीय बुनियादी ढाँचा राज्यों के अधीन हैं।
समर्पित माल गलियारों और गति शक्ति के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए ‘सहकारी संघवाद’ (Cooperative Federalism) का पालन अनिवार्य है। केंद्र सरकार द्वारा गति शक्ति प्लेटफॉर्म में राज्य सरकारों को शामिल किया जाना ‘नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप’ (NPG) के माध्यम से राज्यस्तरीय बुनियादी ढांचा विकास और भूमि विवादों के त्वरित निवारण में सहायता करता है।
(C) राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (NLP) और ULIP
राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति का मुख्य आधार ‘यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म’ (Unified Logistics Interface Platform – ULIP) है। ULIP 7 मंत्रालयों के 30 से अधिक प्रणालियों (जैसे कस्टम्स का ICEGATE, रेलवे का FOIS, सड़क परिवहन का VAHAN/SARATHI) को एकीकृत करता है, जिससे माल की आवाजाही का एकल डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम संभव हो सका है।
5. आर्थिक एवं पर्यावरण/पारिस्थितिकी संबंध (Economic & Environmental/Ecological Connection)
अवसंरचनात्मक सुधार न केवल आर्थिक उत्पादकता से जुड़े हैं, बल्कि उनके गहरे पर्यावरणीय और पारिस्थितिकीय आयाम भी हैं:
- हरित माल गलियारा और डीकार्बोनाइजेशन (Green Freight Corridors): भारत में सड़क परिवहन माल ढुलाई क्षेत्र में लगभग 64% हिस्सेदारी रखता है, जो अत्यधिक डीजल खपत और उच्च कार्बन उत्सर्जन (CO2) के लिए जिम्मेदार है। DFCs पूरी तरह से 100% विद्युतीकृत हैं। सड़क से रेल की ओर माल का हस्तांतरण (Modal Shift) कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में सालाना लाखों टन की कमी ला रहा है।
- ऊर्जा दक्षता एवं नेट-जीरो लक्ष्य: रेल परिवहन सड़क परिवहन की तुलना में प्रति टन-किमी 75-80% कम ईंधन की खपत करता है। यह भारत के COP26 ‘पंचामृत’ संकल्प और वर्ष 2070 तक शुद्ध शून्य (Net Zero) उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने में प्रत्यक्ष भूमिका निभाता है।
- पारिस्थितिक क्षरण में कमी एवं वन्यजीव सुरक्षा: समर्पित माल गलियारों के निर्माण में आधुनिक पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) के तहत वन्यजीव अंडरपास और ओवरपास बनाए गए हैं, जिससे संरक्षित क्षेत्रों के माध्यम से गुजरने वाली पटरियों पर वन्यजीव-ट्रेन टकराव (उदा. हाथी दुर्घटनाएँ) में भारी कमी आई है।
- कृषि उत्पादकता एवं खाद्य सुरक्षा: किसान रेल और DFCs के त्वरित परिवहन से जल्द खराब होने वाले कृषि उत्पादों (Perishable Goods) की कोल्ड-चेन आपूर्ति सुदृढ़ हुई है, जिससे खाद्य अपशिष्ट (Food Spoilage) में कमी आई है और किसानों की आय में वृद्धि हुई है।
6. अभ्यास प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न (Practice Prelims MCQ)
प्रश्न: समर्पित माल गलियारों (DFCs) और ‘पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान’ के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- पश्चिमी समर्पित माल गलियारा (WDFC) उत्तर प्रदेश के दादरी से महाराष्ट्र के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (JNPT) तक फैला हुआ है।
- पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म भास्कराचार्य नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस एप्लिकेशंस एंड जियो-इन्फॉर्मेटिक्स (BISAG-N) द्वारा विकसित 3D/2D जीआईएस स्थानिक योजना उपकरण का उपयोग करता है।
- यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (ULIP) केवल रेल मंत्रालय द्वारा संचालित एक विशेष डेटाबेस प्रणाली है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 2 और 3
(C) केवल 1 और 3
(D) 1, 2 और 3
उत्तर: (A) केवल 1 और 2
व्याख्या:
कथन 1 सही है: पश्चिमी समर्पित माल गलियारा (WDFC) दादरी (उत्तर प्रदेश) को JNPT (मुंबई, महाराष्ट्र) से जोड़ता है।
कथन 2 सही है: पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान को BISAG-N द्वारा विकसित जीआईएस-आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डिजाइन किया गया है जो स्थानिक योजना और वास्तविक समय निगरानी की अनुमति देता है।
कथन 3 गलत है: ULIP (यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म) केवल रेल मंत्रालय की प्रणाली नहीं है, बल्कि यह वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत 7 विभिन्न मंत्रालयों (सड़क, रेल, सीमा शुल्क, नागरिक उड्डयन आदि) की डेटा प्रणालियों को एकीकृत करने वाला एक अंतर-मंत्रालयी डिजिटल प्लेटफॉर्म है।
7. अभ्यास मुख्य परीक्षा प्रश्न एवं मॉडल उत्तर बिंदु (Practice Mains Descriptive Question & Model Answer Points)
प्रश्न (15 अंक / 250 शब्द): “समर्पित माल गलियारे (DFCs) और पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का अभिसरण (Convergence) भारत के बहु-मॉडल परिवहन परिदृश्य को पुनर्परिभाषित करने की अपार क्षमता रखता है।” इस कथन का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए तथा भारत की राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स लागत को घटाने में आ रही प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।
मॉडल उत्तर रूपरेखा (Model Answer Structure):
1. भूमिका (Introduction – लगभग 30-40 शब्द):
भारत में उच्च लॉजिस्टिक्स लागत (GDP का 13-14%) निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता और आर्थिक विकास में एक प्रमुख बाधा रही है। समर्पित माल गलियारों (DFCs) का पीएम गति शक्ति के डिजिटल और भौतिक अवसंरचनात्मक ढांचे के साथ एकीकरण देश में रसद दक्षता (Logistics Efficiency) को क्रांतिकारी रूप से बदलने का काम कर रहा है।
2. मुख्य भाग (Main Body – लगभग 160-180 शब्द):
(A) अभिसरण (Convergence) की क्षमता एवं लाभ:
- क्षमता पृथक्करण एवं गति: यात्री और माल यातायात का पृथक्करण, जिससे मालगाड़ियों की गति 25 किमी/घंटा से बढ़कर 75+ किमी/घंटा हुई है और आपूर्ति श्रृंखला की अनिश्चितता समाप्त हुई है।
- मल्टी-मॉडल एकीकरण (Multimodal Connectivity): गति शक्ति के 16 मंत्रालयों के डिजिटल मैपिंग के माध्यम से DFCs को बंदरगाहों (JNPT, मुंद्रा), राष्ट्रीय राजमार्गों और अंतर्देशीय जलमार्गों से निर्बाध रूप से जोड़ा जा रहा है।
- डिजिटल एकीकरण (ULIP integration): कागजी कार्रवाई की समाप्ति, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं में तेजी और वास्तविक समय ट्रैकिंग से ‘टर्न-अराउंड टाइम’ में भारी गिरावट।
- पर्यावरणीय लाभ: सड़क से रेल परिवहन की ओर बदलाव से भारत के कार्बन पदचिह्न (Carbon Footprint) में बड़ी गिरावट और नेट-जीरो 2070 लक्ष्य में योगदान।
(B) लॉजिस्टिक्स लागत घटाने में प्रमुख चुनौतियाँ:
- अंतिम मील संपर्क (Last-Mile Gaps): फीडर रूटों और स्थानीय सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर की खराब स्थिति।
- भूमि अधिग्रहण एवं अंतर-राज्यीय समन्वय: समवर्ती सूची का विषय होने के कारण राज्यों के साथ भूमि विवाद और मुआवजे में देरी।
- निजी पूंजी जुटाने (PPP) में विफलता: मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्कों के निर्माण में निजी क्षेत्र की सीमित भागीदारी।
- उच्च टैरिफ दरें: यात्री रेल सेवाओं के क्रॉस-सब्सिडी (Cross-Subsidization) के कारण माल ढुलाई भाड़ा ऐतिहासिक रूप से महंगा रहा है।
3. आगे की राह एवं निष्कर्ष (Way Forward & Conclusion – लगभग 40-50 शब्द):
भारत को लॉजिस्टिक्स हब बनाने के लिए गति शक्ति प्लेटफॉर्म का पूर्ण उपयोग करते हुए ‘प्लग-एंड-प्ले’ औद्योगिक पार्कों का विकास, माल ढुलाई दरों का युक्तीकरण (Tariff Rationalization) तथा केंद्र-राज्य समन्वय हेतु अंतर-राज्यीय परिषदों का उपयोग करना होगा। DFCs और PM Gati Shakti का सफल क्रियान्वयन भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने और ‘विकसित भारत @2047’ के सपने को साकार करने का मुख्य आधार है।
