प्रम्बानन मंदिर और इंडोनेशिया में हिंदू धर्म (10 जुलाई 2026) – दैनिक समसामयिकी

समाचार में क्यों?

अपनी तीन देशों की यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 जुलाई 2026 को इंडोनेशिया के योग्यकर्ता स्थित ऐतिहासिक प्रम्बानन मंदिर परिसर का दौरा किया। इस दौरे ने सदियों पुराने भारत-इंडोनेशिया सांस्कृतिक संबंधों को एक बार फिर से जीवंत कर दिया है। यह यात्रा न केवल दक्षिण-पूर्व एशिया में हिंदू धर्म के ऐतिहासिक प्रसार को दर्शाती है, बल्कि इंडोनेशिया के पंचशील सिद्धांत के तहत वहां के धार्मिक भाईचारे को भी रेखांकित करती है। अगर आप UPSC की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो यह टॉपिक आपके लिए बेहद जरूरी है। यह सीधे आपके GS पेपर I (कला एवं संस्कृति) और GS पेपर II (अंतरराष्ट्रीय संबंध) के पाठ्यक्रम से मेल खाता है।

UPSC पाठ्यक्रम से जुड़ाव (Syllabus Mapping)

  • GS पेपर I — कला एवं संस्कृति: भारतीय उपमहाद्वीप से बाहर भारतीय संस्कृति का विस्तार, दक्षिण-पूर्व एशिया का भारतीयकरण और UNESCO विश्व धरोहर स्थल।
  • GS पेपर I — प्राचीन इतिहास: प्राचीन समुद्री व्यापारिक मार्ग और दक्षिण-पूर्व एशिया पर भारतीय साम्राज्यों का प्रभाव।
  • GS पेपर II — अंतरराष्ट्रीय संबंध: भारत-इंडोनेशिया के द्विपक्षीय संबंध, आसियान (ASEAN), सांस्कृतिक कूटनीति (Cultural Diplomacy) और हमारी एक्ट ईस्ट पॉलिसी (Act East Policy)।

प्रम्बानन मंदिर से जुड़े मुख्य तथ्य

प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) के लिहाज से आपको इन महत्वपूर्ण तथ्यों को अपनी उंगलियों पर याद रखना चाहिए:

  • स्थान (Location): यह विशाल मंदिर इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर स्थित योग्यकर्ता (Yogyakarta) में है।
  • कब और किसने बनवाया?: इसे 9वीं शताब्दी (लगभग 850 ईस्वी) में मातारम राजवंश के शासक राजा राकाई पिकातान ने बनवाया था।
  • किसे समर्पित है?: यह मंदिर हिंदू त्रिमूर्ति यानी शिव (संहारक), विष्णु (पालनकर्ता) और ब्रह्मा (सृष्टिकर्ता) को समर्पित है। इस परिसर का सबसे मुख्य और विशाल मंदिर भगवान शिव का है, जिसकी ऊंचाई 47 मीटर है।
  • UNESCO का दर्जा: यूनेस्को ने साल 1991 में इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया।
  • अनोखी वास्तुकला: इस मंदिर में आपको उत्तर भारतीय नागर शैली की तरह ऊंचे शिखर दिखाई देंगे, जो जावा की स्थानीय हिंदू-बौद्ध कला के साथ मिलकर एक अद्भुत छटा बिखेरते हैं।
  • रामायण बैले (सेंद्रताई रामायण): यहां नियमित रूप से होने वाला रामायण नाटक भारत और इंडोनेशिया की साझी सांस्कृतिक विरासत का एक जीवंत प्रमाण है।
  • पड़ोसी धरोहर: इसी मंदिर परिसर से मात्र 40 किलोमीटर दूर 9वीं शताब्दी का प्रसिद्ध बौद्ध स्तूप ‘बोरोबुदुर’ भी स्थित है।

दक्षिण-पूर्व एशिया में हिंदू धर्म का फैलाव: भारतीयकरण

कैसे हुआ संस्कृति का प्रसार?

इतिहासकार दक्षिण-पूर्व एशिया में हिंदू धर्म के इस प्रसार को ‘भारतीयकरण’ (Indianization) या ‘संस्कृतीकरण’ कहते हैं। यह कोई सैन्य आक्रमण नहीं था, बल्कि यह फैलाव तीन शांतिपूर्ण माध्यमों से हुआ:

  • समुद्र के रास्ते व्यापार: पहली शताब्दी ईसवी से ही भारतीय व्यापारी मसालों और अन्य सामानों के व्यापार के लिए इंडोनेशिया और मलय प्रायद्वीप जाने लगे थे। अपने माल के साथ-साथ वे अपनी आस्था और संस्कृति भी वहां ले गए।
  • ब्राह्मण सलाहकारों का प्रभाव: वहां के स्थानीय राजाओं को भारत की राजव्यवस्था, अनुष्ठान और प्रशासनिक व्यवस्था बहुत पसंद आई। उन्होंने अपने यहां अनुष्ठानों के संपादन और राज्याभिषेक के लिए भारतीय ब्राह्मणों को आमंत्रित किया। इसी वजह से वहां के राजाओं ने ‘वर्मन’ और ‘देवराज’ जैसी संस्कृत उपाधियां धारण कीं।
  • आपसी वैवाहिक संबंध: कई भारतीय व्यापारी समय के साथ वहीं बस गए और स्थानीय परिवारों में विवाह कर लिए। इससे दोनों क्षेत्रों की संस्कृतियां आपस में मिल-जुल गईं।

इन प्रमुख साम्राज्यों को जरूर याद रखें

अपनी मुख्य परीक्षा (Mains) के उत्तरों को समृद्ध करने के लिए आप इन ऐतिहासिक साम्राज्यों के उदाहरण दे सकते हैं:

  • फुनान साम्राज्य (1-6वीं शताब्दी): आज के कंबोडिया और वियतनाम के क्षेत्र में फैला यह साम्राज्य दक्षिण-पूर्व एशिया का पहला भारतीयकृत राज्य माना जाता है।
  • श्रीविजय साम्राज्य (7-13वीं शताब्दी): सुमात्रा पर केंद्रित यह एक विशाल समुद्री साम्राज्य था, जिसने व्यापार और संस्कृति दोनों को बढ़ावा दिया।
  • खमेर साम्राज्य (9-15वीं शताब्दी): इसी साम्राज्य के राजाओं ने कंबोडिया में दुनिया के सबसे बड़े हिंदू मंदिर परिसर ‘अंगकोर वाट’ का निर्माण कराया था।
  • माजापहित साम्राज्य (13-16वीं शताब्दी): जावा द्वीप पर शासन करने वाला यह आखिरी महान हिंदू साम्राज्य था।

आज के इंडोनेशिया में हिंदू धर्म की जीवंतता

इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है, लेकिन इसके बावजूद वहां हिंदू संस्कृति रची-बसी है:

  • बाली द्वीप की अनोखी पहचान: इंडोनेशिया के बाली द्वीप पर आज भी लगभग 83% आबादी हिंदू है और वे अपनी प्राचीन परंपराओं का पूरी निष्ठा से पालन करते हैं।
  • राष्ट्रीय प्रतीक ‘गरुड़’: भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ को इंडोनेशिया ने अपना राष्ट्रीय प्रतीक (National Emblem) बनाया है। यहां तक कि वहां की सरकारी हवाई सेवा का नाम भी ‘गरुड़ इंडोनेशिया’ है।
  • वायांग कुलित (छाया कठपुतली): वायांग कुलित (छाया कठपुतली) के जरिए वहां के लोग आज भी रामायण और महाभारत की कहानियों को बड़े चाव से देखते और सुनते हैं।

इंडोनेशिया का ‘पंचशील’ और धार्मिक सहिष्णुता

क्या है यह ‘पंचशील’?

जैसे भारत के संविधान की एक प्रस्तावना है जो हमारे देश के मूल दर्शन को बताती है, वैसे ही इंडोनेशिया के पास उसका ‘पंचशील’ (संस्कृत शब्द, जिसका अर्थ है पांच सिद्धांत) है। इंडोनेशिया के पहले राष्ट्रपति सुकार्नो ने 1 जून 1945 को देश को एकजुट रखने के लिए इन पांच मूलभूत सिद्धांतों की घोषणा की थी:

  1. केतुहानन यांग महा एसा (Ketuhanan Yang Maha Esa): एक परमेश्वर में विश्वास (एकेश्वरवाद)।
  2. केमानुसियान (Kemanusiaan): न्यायप्रिय और सभ्य मानवता।
  3. पेर्साटुआन इंडोनेशिया (Persatuan Indonesia): इंडोनेशिया की राष्ट्रीय एकता।
  4. केरक्यतान (Kerakyatan): आपसी सहमति और सूझबूझ से चलने वाला लोकतंत्र।
  5. केआदिलान सोशल (Keadilan Sosial): सभी नागरिकों के लिए सामाजिक न्याय।

हिंदू धर्म और ‘केतुहानन’ का अनोखा मेल

अब यहां एक बहुत ही दिलचस्प प्रशासनिक और धार्मिक पहलू है, जिसे आपको समझना चाहिए। पंचशील का पहला सिद्धांत — केतुहानन — यह अनिवार्य करता है कि देश के हर नागरिक को एक ईश्वर को मानना होगा। लेकिन हिंदू धर्म में तो हम ईश्वर के कई रूपों की पूजा करते हैं! तो इंडोनेशिया के हिंदुओं ने इस नियम का पालन कैसे किया?

उन्होंने इसका एक बहुत ही सुंदर दार्शनिक हल निकाला। उन्होंने उपनिषदों के मूल सिद्धांत ‘ब्रह्म’ (एकमात्र परम सत्य) को आगे रखा। उन्होंने तर्क दिया कि भले ही पूजा के रूप अलग हों, लेकिन ईश्वर अंततः एक ही है (यानी ब्रह्म)। इस तरह उन्होंने संवैधानिक मूल्यों और अपनी आस्था के बीच एक बेहतरीन संतुलन बनाया। मुख्य परीक्षा में जब आप धर्मनिरपेक्षता (Secularism) या संवैधानिक संरचनाओं पर उत्तर लिख रहे हों, तो इस उदाहरण का जिक्र जरूर करें।

भारत-इंडोनेशिया सांस्कृतिक कूटनीति

आज दोनों देशों के संबंध केवल आधुनिक कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे एक बहुत मजबूत सांस्कृतिक नींव है:

  • 2,000 से अधिक वर्षों का साझा इतिहास: भारत और इंडोनेशिया के बीच व्यापार, कला और विचारों का लेन-देन सदियों पुराना है।
  • संस्कृत भाषा का गहरा असर: इंडोनेशिया की आधिकारिक भाषा ‘बहासा इंडोनेशिया’ में आज भी संस्कृत के कई शब्द रचे-बसे हैं (जैसे: भाषा, राजा, देवता, कर्म, योग)।
  • रणनीतिक साझेदारी: साल 2018 में दोनों देशों ने आपसी संबंधों को मजबूत करते हुए ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ (Comprehensive Strategic Partnership) की स्थापना की।
  • एक्ट ईस्ट पॉलिसी (Act East Policy): भारत की विदेश नीति के तहत, दक्षिण-पूर्व एशिया में इंडोनेशिया हमारा एक बेहद महत्वपूर्ण और केंद्रीय भागीदार है।
  • सांस्कृतिक आदान-प्रदान: भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) के जरिए दोनों देश रामायण महोत्सव, योग शिविर और संस्कृत अध्ययन को बढ़ावा दे रहे हैं।
  • कूटनीति का प्रतीक: प्रधानमंत्री मोदी का प्रम्बानन मंदिर का दौरा केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक कूटनीति (Soft Power) का एक दमदार प्रदर्शन है।

अपनी तैयारी को परखें: प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न (MCQ)

प्रश्न: प्रम्बानन मंदिर परिसर के संदर्भ में नीचे दिए गए कथनों पर विचार कीजिए:

  1. यह मंदिर 9वीं शताब्दी में बना था और हिंदू त्रिमूर्ति को समर्पित है।
  2. यह इंडोनेशिया के बाली द्वीप पर स्थित है।
  3. यूनेस्को (UNESCO) ने साल 1991 में इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था।
  4. इस पूरे मंदिर परिसर का सबसे ऊंचा मंदिर भगवान ब्रह्मा को समर्पित है।

ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?

  • (a) केवल 1 और 3
  • (b) केवल 1, 2 और 3
  • (c) केवल 2 और 4
  • (d) 1, 2, 3 और 4

सही उत्तर: (a) केवल 1 और 3
स्पष्टीकरण: आइए देखें कि बाकी कथन क्यों गलत हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि प्रम्बानन मंदिर बाली में नहीं, बल्कि इंडोनेशिया के जावा द्वीप के योग्यकर्ता में स्थित है। कथन 4 भी गलत है क्योंकि इस परिसर का सबसे ऊंचा मंदिर भगवान शिव को समर्पित है (ब्रह्मा को नहीं), जिसकी ऊंचाई लगभग 47 मीटर है।

मुख्य परीक्षा (Mains) अभ्यास प्रश्न

“प्रधानमंत्री की प्रम्बानन मंदिर यात्रा केवल एक औपचारिक राजनीतिक कदम नहीं है, बल्कि यह भारत की ऐतिहासिक सांस्कृतिक सॉफ्ट power का एक बेहतरीन प्रदर्शन है। इस कथन के आलोक में, भारत-इंडोनेशिया के ऐतिहासिक सभ्यतागत संबंधों और भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ में इसके महत्व का विश्लेषण कीजिए।” (GS पेपर II, 250 शब्द)

उत्तर लिखने का ढांचा (Answer Structure):

  • प्रस्तावना (Introduction): दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय संस्कृति के प्रसार (भारतीयकरण) का एक संक्षिप्त इतिहास लिखें और प्रम्बानन मंदिर को इस गहरे जुड़ाव के प्रतीक के रूप में पेश करें।
  • मुख्य भाग (Body): प्राचीन समुद्री व्यापारिक मार्गों, इंडोनेशियाई भाषा में संस्कृत के प्रभाव और दोनों देशों के बीच आज की रणनीतिक और आसियान (ASEAN) स्तर की साझेदारी का जिक्र करें।
  • निष्कर्ष (Conclusion): हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में भारत की सांस्कृतिक कूटनीति के महत्व को रेखांकित करते हुए एक सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ उत्तर समाप्त करें।

यह अध्ययन नोट IAS EasyWay की दैनिक समसामयिकी पहल का एक हिस्सा है।


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लेखिका के बारे में: भाग्यश्री

भाग्यश्री एक वरिष्ठ सिविल सेवा मेंटर और एजुकेटर हैं, जिन्हें UPSC और MPSC उम्मीदवारों का मार्गदर्शन करने का 8 से अधिक वर्षों का अनुभव है। उन्होंने स्वयं कई बार सिविल सेवा मुख्य परीक्षा (Mains) पास की है और सैकड़ों सफल प्रशासनिक अधिकारियों को पढ़ाया है। जटिल GS पाठ्यक्रम और CSAT रणनीतियों को आसान, व्यावहारिक अध्ययन रूपरेखा में तोड़ना उनकी खासियत है।

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