समाचार में क्यों?

भारत सरकार ने हाल ही में स्वीकार किया कि E20 ईंधन — यानी पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रित ईंधन — कुछ पुराने वाहनों में 3 से 5% तक माइलेज में कमी ला सकता है। हालाँकि सरकार ने इस नीति का बचाव करते हुए उच्च ऑक्टेन रेटिंग, कम उत्सर्जन और ऊर्जा सुरक्षा के लाभों को रेखांकित किया। यह वक्तव्य राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति 2018 (2022 में संशोधित) और 2025 तक E20 लक्ष्य प्राप्त करने की पृष्ठभूमि में आया है। इस स्वीकारोक्ति ने उपभोक्ताओं, वाहन निर्माताओं और नीति-निर्माताओं के बीच इस नीति के आर्थिक एवं पर्यावरणीय पक्षों पर बहस छेड़ दी है।

GS पेपर III पाठ्यक्रम मैपिंग

  • ऊर्जा सुरक्षा: कच्चे तेल पर निर्भरता, जैव ईंधन से विविधीकरण, आयात बिल में कमी।
  • पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी: वाहन उत्सर्जन में कमी, GHG न्यूनीकरण, पेरिस समझौता।
  • सरकारी नीतियाँ: राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति 2018, EBP कार्यक्रम, पंच प्रण, आत्मनिर्भर भारत।
  • कृषि एवं खाद्य सुरक्षा: गन्ना उत्पादन, किसान आय, भोजन बनाम ईंधन विवाद।
  • भारतीय अर्थव्यवस्था: विदेशी मुद्रा बचत, ग्रामीण रोजगार सृजन।

राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति 2018 (2022 में संशोधित)

भारत की राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति 2018 जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम थी। 2022 में इसमें व्यापक संशोधन किया गया ताकि इथेनॉल सम्मिश्रण लक्ष्यों को तेज गति से हासिल किया जा सके।

नीति की प्रमुख विशेषताएँ

  • लक्ष्य को आगे लाना: 2022 के संशोधन ने E20 का लक्ष्य 2030 से बदलकर 2025 कर दिया।
  • विस्तारित फीडस्टॉक: गन्ने के अलावा क्षतिग्रस्त अनाज, कृषि अवशेष, FCI के अधिशेष चावल से भी इथेनॉल उत्पादन की अनुमति।
  • जैव ईंधन का वर्गीकरण: मूल (1G — खाद्य फसलों से) और उन्नत (2G — गैर-खाद्य बायोमास से; 3G — शैवाल से)।
  • राष्ट्रीय जैव ईंधन समन्वय समिति (NBCC): कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में नीति पर्यवेक्षण।
  • वायबिलिटी गैप फंडिंग: 2G इथेनॉल परिशोधनशालाओं के लिए लागत अंतर पाटना।
  • मूल्य निर्धारण: सरकार प्रतिवर्ष इथेनॉल खरीद मूल्य तय करती है।

E10 से E20 रोडमैप: भारत की सम्मिश्रण यात्रा

  1. 2001: चुनिंदा राज्यों में 5% इथेनॉल सम्मिश्रण के साथ EBP कार्यक्रम शुरू।
  2. 2013: पूरे देश में E5 अनिवार्य मिश्रण अधिसूचित।
  3. 2018–19: कई राज्यों में E10 लक्ष्य हासिल। राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति औपचारिक।
  4. 2022–23: मिश्रण 10% से अधिक — ऐतिहासिक उपलब्धि।
  5. 2023–24: मिश्रण लगभग 13–14% तक पहुँचा।
  6. 2025 (लक्ष्य): पूरे भारत में पेट्रोल में 20% इथेनॉल सम्मिश्रण

E20 सम्मिश्रण के लाभ

1. ऊर्जा सुरक्षा

भारत अपनी 85% से अधिक कच्चे तेल की जरूरत आयात करता है। E20 स्तर पर सम्मिश्रण से वार्षिक लगभग ₹30,000 करोड़ की विदेशी मुद्रा बचत संभव। यह आत्मनिर्भर भारत और पंच प्रण से जुड़ा है तथा वैश्विक तेल मूल्य अस्थिरता के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान करता है।

2. किसान आय में वृद्धि

  • गन्ना क्षेत्र से जुड़े लगभग 5 करोड़ किसानों और 50 लाख से अधिक मजदूरों को लाभ।
  • मिलों की गन्ना बकाया ₹20,000+ करोड़ (2017) से घटकर ₹3,000 करोड़ से कम (2023) हुई।
  • FRP का समय पर भुगतान सुनिश्चित।
  • सरकारी खरीद मूल्य से स्थिर आय की गारंटी।

3. उत्सर्जन में कमी

  • इथेनॉल ऑक्सीजनयुक्त ईंधन है — अधिक पूर्ण दहन होता है।
  • कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) उत्सर्जन में 50% तक कमी।
  • जीवनचक्र आधार पर GHG उत्सर्जन पेट्रोल की तुलना में 50% कम।
  • पेरिस समझौते के तहत भारत के NDC लक्ष्यों (2030 तक उत्सर्जन तीव्रता में 35% कमी) में योगदान।

व्यापार-तडजोड और चुनौतियाँ

1. माइलेज में कमी

इथेनॉल की ऊर्जा घनता पेट्रोल की लगभग 66% है। परिणामस्वरूप:

  • पुराने वाहनों (BS6 से पहले के) में ध्यान देने योग्य माइलेज गिरावट हो सकती है।
  • यदि इथेनॉल का मूल्य आनुपातिक रूप से कम नहीं है तो उपभोक्ता पर आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
  • E20-अनुकूलित वाहनों में यह प्रभाव न्यूनतम होता है।

2. इंजन अनुकूलता

  • उच्च इथेनॉल मिश्रण पुराने वाहनों के रबर सील और धातु भागों को नुकसान पहुँचा सकता है।
  • आर्द्र जलवायु में फेज सेपरेशन की समस्या।
  • कार्बोरेटर वाली दोपहिया (भारत में लगभग 20 करोड़) ठंड में स्टार्ट होने में कठिनाई।

3. भोजन बनाम ईंधन विवाद

  • भारत में अभी भी 19.3 करोड़ कुपोषित लोग हैं (FAO 2023)। खाद्यान्न को ईंधन के लिए मोड़ना नैतिक प्रश्न उठाता है।
  • गन्ना खेती बढ़ने से महाराष्ट्र, UP जैसे जल-तनावग्रस्त राज्यों में जल संकट गहरा सकता है।
  • चीनी की कीमतें बढ़ने पर गरीब उपभोक्ताओं पर सीधा असर।

4. जल की खपत

गन्ना अत्यधिक जल-गहन फसल है — प्रति किलोग्राम लगभग 1,500–2,000 लीटर जल। पहले से जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ाना भूजल के लिए खतरनाक है।

वैश्विक उदाहरण: ब्राज़ील का ProÁlcool कार्यक्रम

  • ProÁlcool (1975): 1973 के तेल संकट के बाद ब्राज़ील ने राष्ट्रीय अल्कोहल कार्यक्रम शुरू किया।
  • ब्राज़ील आज E27 (27% मिश्रण) को मानक के रूप में उपयोग करता है और फ्लेक्स-फ्युएल वाहन सर्वत्र उपलब्ध हैं।
  • वार्षिक उत्पादन लगभग 30 अरब लीटर — अमेरिका के बाद विश्व में दूसरा स्थान।
  • सफलता के कारक: दीर्घकालिक सरकारी समर्थन, बुनियादी ढाँचे में निवेश, ऑटोमोबाइल क्षेत्र में तकनीकी अनुकूलन, और दशकों में बनी उपभोक्ता स्वीकृति।
  • भारत से तुलना: भारत अभी प्रारंभिक चरण में है। फ्लेक्स-फ्युएल बुनियादी ढाँचे और वाहन बेड़े की आयु में भारी अंतर है।

भारत का चीनी अधिशेष और इथेनॉल अर्थशास्त्र

  • भारत विश्व का सबसे बड़ा चीनी उत्पादक (2022–23 से) — वार्षिक उत्पादन 35+ मिलियन टन।
  • चीनी अधिशेष से मूल्य गिरावट, मिल बकाया, किसान संकट — इथेनॉल मोड़ना संरचनात्मक राहत उपाय है।
  • सरकारी खरीद मूल्य (2023–24): C-हेवी मोलासेस ₹65.61/लि., B-हेवी मोलासेस ₹70.46/लि., गन्ना रस ₹89.76/लि.।
  • 2022–23 में सम्मिश्रण हेतु इथेनॉल आपूर्ति 500 करोड़ लीटर से अधिक

SDG से जुड़ाव

  • SDG 7 — सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा: जैव ईंधन स्वच्छ ऊर्जा मिश्रण में योगदान।
  • SDG 8 — सभ्य कार्य और आर्थिक वृद्धि: किसानों और कारखाना मजदूरों की आय बढ़ती है।
  • SDG 13 — जलवायु कार्रवाई: GHG कमी भारत के NDC लक्ष्यों में सहायक।
  • SDG 2 — शून्य भूख: भोजन बनाम ईंधन विवाद का सीधा संबंध।
  • SDG 12 — जिम्मेदार उपभोग एवं उत्पादन: कृषि अवशेषों के उपयोग से वृत्ताकार अर्थव्यवस्था।

प्रारंभिक परीक्षा MCQ

प्रश्न:

भारत के इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति 2018 को 2022 में संशोधित कर E20 का लक्ष्य 2030 से बदलकर 2025 किया गया।
  2. E20 ईंधन का रिसर्च ऑक्टेन नंबर (RON) शुद्ध पेट्रोल से कम होता है।
  3. गन्ने के रस से उत्पादित इथेनॉल को C-हेवी मोलासेस से उत्पादित इथेनॉल की तुलना में अधिक सरकारी खरीद मूल्य मिलता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 1 और 3
  • (c) केवल 2 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b) केवल 1 और 3

स्पष्टीकरण: कथन 1 सही है — 2022 संशोधन ने E20 लक्ष्य आगे लाया। कथन 2 गलत है — E20 का RON शुद्ध पेट्रोल से अधिक होता है। कथन 3 सही है — गन्ना रस इथेनॉल को सर्वाधिक ₹89.76/लि. मिलता है।

मुख्य परीक्षा प्रश्न (GS पेपर III)

प्रश्न:

“भारत का E20 इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम एक रणनीतिक आवश्यकता भी है और एक नीतिगत दुविधा भी।” ऊर्जा सुरक्षा, सामाजिक-आर्थिक प्रभावों और व्यापार-तडजोड का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)

उत्तर बिंदु:

  • प्रस्तावना: तेल आयात निर्भरता (85%), E20 लक्ष्य 2025, माइलेज घटी की सरकारी स्वीकृति।
  • लाभ: विदेशी मुद्रा बचत (~₹30,000 करोड़/वर्ष), किसान आय, GHG कमी, चीनी अधिशेष प्रबंधन, Atmanirbhar Bharat।
  • चुनौतियाँ: माइलेज में 3–5% कमी, इंजन अनुकूलता, भोजन-ईंधन विवाद, जल संकट, आपूर्ति श्रृंखला की भंगुरता।
  • वैश्विक सीख (ब्राज़ील ProÁlcool): दीर्घकालिक नीति, फ्लेक्स-फ्युएल प्रौद्योगिकी, उपभोक्ता अनुकूलन।
  • आगे का मार्ग: 2G/3G इथेनॉल विस्तार, फ्लेक्स-फ्युएल वाहन मानक, आनुपातिक मूल्य निर्धारण, जल-तटस्थ कृषि पद्धतियाँ।
  • निष्कर्ष: E20 एक अनिवार्य रणनीतिक बदलाव है — सफलता ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, तकनीकी अनुकूलता और न्यायसंगत उपभोक्ता अर्थशास्त्र के संतुलन पर निर्भर है।

यह अध्ययन नोट IAS EasyWay की दैनिक समसामयिकी पहल का एक हिस्सा है।

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