समाचार में क्यों?

११ जुलाई २०२६ को एक दोषपूर्ण सिग्नल प्रणाली के कारण एक ही पटरी पर दो ट्रेनें खतरनाक रूप से एक-दूसरे के नजदीक आ गईं, जिससे एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। लोको पायलटों ने सिग्नल प्रणाली की बार-बार होने वाली विफलताओं पर गहरी चिंता जताई है। रेल मंत्रालय ने इस घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। यह घटना UPSC GS पेपर III के अंतर्गत रेलवे बुनियादी ढांचे और आपदा प्रबंधन को पुनः चर्चा के केंद्र में लाती है।

GS पाठ्यक्रम मानचित्रण

  • GS पेपर III – अवसंरचना: भारतीय रेलवे का आधुनिकीकरण, कवच प्रणाली, तकनीकी उन्नयन
  • GS पेपर III – आपदा प्रबंधन: निवारक तंत्र, NDMA दिशानिर्देश, आपातकालीन प्रतिक्रिया
  • GS पेपर III – आंतरिक सुरक्षा: महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा

भारतीय रेलवे सिग्नल प्रणाली: एक अवलोकन

भारतीय रेलवे विश्व के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से एक है, जिसमें ६७,००० से अधिक मार्ग किलोमीटर और प्रतिदिन लगभग १३,००० गाड़ियाँ शामिल हैं। इस विशाल नेटवर्क की सुरक्षा बहु-स्तरीय सिग्नलिंग और ट्रेन नियंत्रण प्रणाली पर निर्भर करती है।

१. परम ब्लॉक प्रणाली (ABS)

यह पारंपरिक प्रणाली सुनिश्चित करती है कि एक ब्लॉक खंड में एक समय में केवल एक ट्रेन हो। यह स्टेशन मास्टरों द्वारा संचालित मैनुअल/इलेक्ट्रोमेकेनिकल उपकरणों पर निर्भर करती है। मानवीय त्रुटि और घनी यातायात में धीमी प्रतिक्रिया इसकी सीमाएं हैं।

२. स्वचालित ट्रेन संरक्षण (ATP)

ATP तकनीक तब स्वचालित रूप से ब्रेक लगाती है जब लोको पायलट खतरे के सिग्नल पर प्रतिक्रिया देने में विफल रहता है। यह सिग्नल पास्ड एट डेंजर (SPAD) घटनाओं को रोकने के लिए अत्यंत प्रभावी है।

३. कवच प्रणाली (TCAS)

कवच (पूर्व में TCAS) भारत की स्वदेशी रूप से विकसित, SIL-4 प्रमाणित स्वचालित ट्रेन संरक्षण प्रणाली है, जिसे RDSO और निजी कंपनियों ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। कवच की मुख्य विशेषताएं:

  • एक ही पटरी पर दो ट्रेनों के आने पर स्वचालित ब्रेकिंग
  • SPAD घटनाओं की रोकथाम
  • रेडियो के माध्यम से लोको पायलटों के बीच सीधा संचार
  • खराब दृश्यता में गति प्रतिबंध प्रवर्तन
  • नेटवर्क मॉनिटर सिस्टम (NMS) द्वारा केंद्रीय निगरानी
  • स्वचालित SOS अलर्ट

२०२६ तक, कवच लगभग १०,०००+ मार्ग किलोमीटर पर तैनात किया जा चुका है, मुख्यतः दक्षिण मध्य रेलवे पर।

सिग्नल विफलता के कारण

  • पुरानी बुनियादी संरचना: दशकों पुरानी रिले-आधारित प्रणाली अभी भी बड़े हिस्से में उपयोग में है।
  • अपर्याप्त रखरखाव: बजटीय बाधाएं और प्रशिक्षित सिग्नल इंजीनियरों की कमी।
  • चरम मौसम: बाढ़, बिजली गिरना और लू सिग्नल केबल को नुकसान पहुंचाते हैं।
  • चूहों की समस्या: चूहों द्वारा केबल कुतरना एक निरंतर और गंभीर समस्या है।
  • सॉफ्टवेयर दोष: नई इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों में बग या गलत कॉन्फिगरेशन।
  • तोड़फोड़ और चोरी: ग्रामीण क्षेत्रों में तांबे के केबल की चोरी।
  • मानवीय त्रुटि: सिग्नल पैनल का गलत संचालन।

NDMA की भूमिका

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) आपदा प्रबंधन अधिनियम, २००५ के अंतर्गत ट्रेन दुर्घटनाओं की रोकथाम और न्यूनीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है:

  • दिशानिर्देश और SOP: NDMA बचाव कार्यों, चिकित्सा निकासी और सार्वजनिक संचार के लिए मानक प्रक्रियाएं जारी करता है।
  • क्षमता निर्माण: NDMA, NDRF के साथ मॉक ड्रिल आयोजित करता है और ARMV दल को प्रशिक्षित करता है।
  • समन्वय: प्रमुख दुर्घटनाओं के दौरान रेलवे, राज्य सरकारों, NDRF और स्वास्थ्य विभाग के बीच समन्वय।
  • दुर्घटना राहत ट्रेनें (ART): रणनीतिक स्थानों पर ART की पूर्व-स्थिति के लिए दिशानिर्देश।

हालिया रेल दुर्घटनाएं और सबक

ओडिशा बालासोर त्रि-ट्रेन टक्कर (२ जून २०२३)

बालासोर आपदा में कोरोमंडल एक्सप्रेस, बेंगलुरु-हावड़ा एक्सप्रेस और एक माल गाड़ी शामिल थी। इस दुर्घटना में २९६ लोगों की जान गई और १,१०० से अधिक घायल हुए।

  • कारण: इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग खराबी के कारण कोरोमंडल एक्सप्रेस माल गाड़ी खड़ी लूप लाइन पर मुड़ गई।
  • प्रमुख सबक: बालासोर खंड पर कवच तैनात नहीं था। इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग के लिए फेल-सेफ रिडंडेंसी आवश्यक है।

अन्य उल्लेखनीय घटनाएं

  • कंचनजंघा एक्सप्रेस टक्कर (जून २०२४): पश्चिम बंगाल में माल गाड़ी ने कंचनजंघा एक्सप्रेस को टक्कर मारी, जिसमें १० लोगों की मौत हुई।
  • कवच की प्रभावशीलता (मार्च २०२२): नियंत्रित परीक्षण में कवच ने आमने-सामने की टक्कर को सफलतापूर्वक रोका।

सरकार द्वारा उठाए गए कदम

  • मिशन कवच: ४०,०००+ किमी उच्च-घनत्व नेटवर्क पर कवच की त्वरित तैनाती।
  • राष्ट्रीय रेल संरक्षण कोष (RRSK): सुरक्षा कार्यों के लिए ₹१ लाख करोड़ का समर्पित कोष।
  • रेलवे सुरक्षा आयोग (CRS): स्वतंत्र निरीक्षण और दुर्घटना जांच के लिए मजबूत भूमिका।
  • शून्य दुर्घटना मिशन: प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण और बुनियादी ढांचे के उन्नयन के माध्यम से शून्य दुर्घटना का लक्ष्य।
  • स्वचालित ब्लॉक सिग्नलिंग (ABS) विस्तार: उच्च-घनत्व मार्गों पर मैनुअल ब्लॉक खंडों को स्वचालित करना।
  • रियल-टाइम निगरानी: GPS-आधारित ट्रेन ट्रैकिंग प्रणालियों के साथ एकीकृत नियंत्रण कार्यालयों (ICO) का एकीकरण।

आगे का रास्ता (Way Forward)

  • कवच तैनाती को मिशन-मोड में गति दें; समयबद्ध लक्ष्य निर्धारित करें।
  • स्वतंत्र रेलवे सुरक्षा नियामक (रेल मंत्रालय से अलग) स्थापित करें।
  • IoT-आधारित सेंसर के माध्यम से पूर्वानुमानित रखरखाव को मुख्यधारा में लाएं।
  • सिग्नल विभाग में रिक्त पदों को भरने के लिए विशेष भर्ती और प्रशिक्षण कार्यक्रम।
  • जापान के शिंकानसेन और यूरोप के ETCS की सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाएं।
  • सुरक्षा उल्लंघन की रिपोर्ट करने वाले लोको पायलटों और सिग्नल इंजीनियरों को व्हिसलब्लोअर सुरक्षा प्रदान करें।
  • त्रैमासिक रेलवे सुरक्षा समीक्षा के लिए संसदीय स्थायी समिति तंत्र स्थापित करें।

प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न (MCQ)

प्रश्न:

भारतीय रेलवे द्वारा तैनात ‘कवच’ प्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. इसे अनुसंधान अभिकल्प और मानक संगठन (RDSO) द्वारा विकसित किया गया है और यह सुरक्षा अखंडता स्तर ४ (SIL-4) प्रमाणित है।
  2. यह सिग्नल पास्ड एट डेंजर (SPAD) घटना का पता चलने पर स्वचालित रूप से ब्रेक लगाता है।
  3. जून २०२३ में बालासोर त्रि-ट्रेन टक्कर के समय यह बालासोर खंड पर चालू था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल १ और २    (b) केवल २ और ३    (c) केवल १ और ३    (d) १, २ और ३

उत्तर: (a) केवल १ और २

व्याख्या: कथन १ और २ सही हैं। कवच वास्तव में RDSO द्वारा विकसित है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त SIL-4 प्रमाणित है। यह SPAD रोकने के लिए स्वचालित रूप से ब्रेक लगाता है। कथन ३ गलत है — बालासोर खंड पर कवच तैनात नहीं था, जो तेज कवच तैनाती के पक्ष में सबसे मजबूत तर्क बना।

मुख्य परीक्षा मॉडल प्रश्न

प्रश्न:

“भारतीय रेलवे में बार-बार होने वाली सिग्नल विफलताएं बुनियादी ढांचे की सुरक्षा शासन में प्रणालीगत कमियों को उजागर करती हैं।” हालिया घटनाओं के संदर्भ में, चुनौतियों का आलोचनात्मक विश्लेषण करें और भारत में रेलवे सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक ढांचा सुझाएं। (२५० शब्द)

उत्तर के प्रमुख बिंदु:

  • परिचय: जुलाई २०२६ की निकट-चूक + बालासोर (२०२३) का उदाहरण
  • चुनौतियां: पुरानी सिग्नल बुनियादी संरचना, कवच की धीमी तैनाती, रेलवे स्वयं ऑपरेटर और सुरक्षा नियामक, कर्मचारी कमी
  • सुधार ढांचा: मिशन-मोड कवच तैनाती, स्वतंत्र नियामक, IoT रखरखाव, SIL-4 अनिवार्यता, NDMA-रेलवे संयुक्त SOP
  • निष्कर्ष: रेलवे सुरक्षा सार्वजनिक विश्वास का विषय है; प्रौद्योगिकी-चालित, संस्थागत रूप से स्वतंत्र सुरक्षा संरचना ही एकमात्र स्थायी समाधान है।

यह अध्ययन नोट IAS EasyWay की दैनिक समसामयिकी पहल का एक हिस्सा है।

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