UPSC (IAS) परीक्षा में भारतीय संविधान के भाग III (मौलिक अधिकार) और भाग IV (DPSP) से लगभग हर साल प्रश्न पूछे जाते हैं। इन दोनों के बीच का वैचारिक अंतर समझना बहुत जरूरी है।

मौलिक अधिकार (Fundamental Rights)

  • ये संविधान के भाग III (अनुच्छेद 12-35) में दिए गए हैं। इन्हें अमेरिका के संविधान से लिया गया है।
  • ये न्यायोचित (Justiciable) हैं, अर्थात इनके हनन पर नागरिक सीधे सर्वोच्च न्यायालय (अनुच्छेद 32) या उच्च न्यायालय (अनुच्छेद 226) जा सकते हैं।
  • ये मुख्य रूप से राज्य के खिलाफ नकारात्मक निषेधाज्ञा (Negative injunctions) हैं जो राज्य को कुछ निश्चित कार्य करने से रोकते हैं (जैसे भेदभाव न करना)।
  • इनका उद्देश्य देश में राजनीतिक लोकतंत्र (Political Democracy) की स्थापना करना है।

राज्य के नीति निदेशक तत्व (DPSP)

  • ये संविधान के भाग IV (अनुच्छेद 36-51) में दिए गए हैं और आयरलैंड के संविधान से प्रेरित हैं।
  • ये गैर-न्यायोचित (Non-justiciable) हैं। सरकार को इन्हें लागू करने के लिए अदालत द्वारा बाध्य नहीं किया जा सकता।
  • ये सकारात्मक निर्देश हैं जो राज्य को नीतियां बनाते समय ध्यान में रखने चाहिए।
  • इनका उद्देश्य देश में सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र (Social and Economic Democracy) स्थापित करना है (जैसे समान कार्य के लिए समान वेतन)।

Previous Year Question (PYQ)

UPSC Prelims 2020: भारतीय संविधान के भाग IV में अंतर्विष्ट प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
1. वे न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय होंगे।
2. वे किसी भी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं होंगे।
3. इस भाग में अधिकथित सिद्धांत राज्य के द्वारा कानून बनाने को प्रभावित करेंगे।

(उत्तर: केवल 2 और 3 – क्योंकि DPSP गैर-न्यायोचित हैं लेकिन शासन के लिए मूलभूत हैं।)

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