UPSC (IAS) परीक्षा में ‘कला एवं संस्कृति’ (Art and Culture) विषय से मंदिर वास्तुकला पर अक्सर प्रश्न पूछे जाते हैं। भारतीय मंदिर वास्तुकला को मुख्य रूप से तीन शैलियों में बांटा जाता है: नागर (उत्तर भारतीय), द्रविड़ (दक्षिण भारतीय), और वेसर (मिश्रित)।
नागर शैली (Nagara Style)
- क्षेत्र: मुख्य रूप से उत्तर भारत (हिमालय से विंध्य पर्वत तक) में पाई जाती है।
- विशेषताएं:
- मंदिर एक ऊंचे चबूतरे (Platform) पर बनाए जाते हैं जिसे ‘जगती’ कहा जाता है।
- इनमें आमतौर पर चारदीवारी या विशाल प्रवेश द्वार (गोपुरम) नहीं होते।
- गर्भगृह के ऊपर का शिखर वक्ररेखीय (Curvilinear) होता है। इसके शीर्ष पर एक ‘आमलक’ (Amalaka) और उसके ऊपर ‘कलश’ (Kalasha) होता है।
- उदाहरण: खजुराहो के मंदिर (मध्य प्रदेश), कोणार्क का सूर्य मंदिर (ओडिशा)।
द्रविड़ शैली (Dravida Style)
- क्षेत्र: दक्षिण भारत (कृष्णा नदी से कन्याकुमारी तक)।
- विशेषताएं:
- मंदिर एक चारदीवारी के भीतर स्थित होते हैं।
- प्रवेश द्वार बहुत विशाल और अलंकृत होते हैं, जिन्हें ‘गोपुरम’ (Gopuram) कहा जाता है।
- मुख्य मंदिर का शिखर पिरामिड (Pyramidal) आकार का होता है, जिसे ‘विमान’ (Vimana) कहा जाता है। शीर्ष पर एक अष्टकोणीय स्तूपिका (Shikhara) होती है।
- मंदिर परिसर में एक बड़ा जल कुंड (Tank) होना अनिवार्य विशेषता है।
- उदाहरण: बृहदेश्वर मंदिर (तंजावुर), मीनाक्षी मंदिर (मदुरै)।
Previous Year Question (PYQ)
UPSC Mains 2014: चोल वास्तुकला (द्रविड़ शैली) मंदिर वास्तुकला के विकास में एक उच्च शिखर का प्रतिनिधित्व करती है। चर्चा करें। (Chola architecture represents a high watermark in the evolution of temple architecture. Discuss.)
