Sonam Wangchuk hunger strike LIVE: Police hospitalise Wangchuk; CJP’s Dipke begins indefinite hunger strike at Jantar Mantar (July 18, 2026) – दैनिक समसामयिकी विश्लेषण

सोनम वांगचुक अनशन और लद्दाख का संवैधानिक संघर्ष: एक विस्तृत विश्लेषण

क्या आपने कभी सोचा है कि लद्दाख जैसे बेहद शांत और खूबसूरत इलाके के लोग अचानक सड़कों पर क्यों उतर आए हैं? लद्दाख के मशहूर पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक अपनी मांगों को लेकर अनशन पर बैठे थे। सेहत बिगड़ने के बाद पुलिस ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया है। लेकिन पुलिस की इस कार्रवाई से आंदोलन थमा नहीं, बल्कि इसे लद्दाख के लोगों का और भी भारी समर्थन मिल रहा है। सोनम की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने साफ कर दिया है कि अगर उनके पति 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च में शामिल नहीं हो पाते, तो वह खुद इस मार्च की अगुवाई करेंगी। वहीं, दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी के दिपके भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। यह पूरा घटनाक्रम सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह हमारे संविधान, केंद्र-राज्य संबंधों और जनजातीय अधिकारों की एक बड़ी तस्वीर पेश करता है।

पाठ्यक्रम प्रासंगिकता (Syllabus Relevance)

यदि आप UPSC या State PSC परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो मुख्य परीक्षा (Mains) के लिहाज से यह मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण है। आप इसे अपने पाठ्यक्रम के निम्नलिखित भागों से जोड़ सकते हैं:

  • सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-II (GS-2): भारतीय संविधान की विशेषताएं, ऐतिहासिक आधार, संशोधन, प्रमुख प्रावधान और बुनियादी ढांचा (Basic Structure)। इसके साथ ही, केंद्र-राज्य संबंध और विभिन्न राज्यों के लिए विशेष संवैधानिक प्रावधान।
  • सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-III (GS-3): पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास (Sustainable Development) और विकास से जुड़े मुद्दे।

प्रमुख बिंदु और संरचनात्मक मुद्दे

लद्दाख के लोग आखिर क्या चाहते हैं? सोनम वांगचुक का यह आंदोलन मुख्य रूप से तीन बड़ी मांगों के इर्द-गिर्द घूमता है, जो लद्दाख के भविष्य के लिए बेहद संवेदनशील हैं:

  • पूर्ण राज्य का दर्जा: केंद्र सरकार ने साल 2019 में जम्मू-कश्मीर से लद्दाख को अलग करके एक केंद्र शासित प्रदेश (UT) बना दिया था। अब वहां के स्थानीय लोग पूर्ण राज्य की मांग कर रहे हैं ताकि वे अपने संसाधनों और नीतियों को खुद तय कर सकें।
  • संविधान की छठी अनुसूची में शामिल होना: लद्दाख की लगभग 90% आबादी जनजातीय है। छठी अनुसूची लागू होने से वहां स्वायत्त जिला परिषदें (Autonomous District Councils – ADCs) बनेंगी। ये परिषदें स्थानीय संस्कृति, जमीन और नौकरियों को बचाने के लिए खुद कानून बना सकती हैं।
  • लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व की बहाली: केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद लद्दाख की प्रशासनिक कमान उपराज्यपाल (LG) के हाथों में चली गई। स्थानीय लोगों का मानना है कि इससे अधिकारियों का राज (नौकरशाही) हावी हो गया है और जनता की चुनी हुई आवाजें कमजोर पड़ गई हैं।

संवैधानिक और कानूनी विश्लेषण

परीक्षा में बेहतर अंक पाने के लिए आपको इस पूरे मुद्दे के संवैधानिक आधार को गहराई से समझना होगा। आइए इसके दो सबसे महत्वपूर्ण पक्षों का विश्लेषण करते हैं:

छठी अनुसूची क्या है?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 244(2) और अनुच्छेद 275(1) असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन के लिए ‘छठी अनुसूची’ का प्रावधान करते हैं। इसके तहत संविधान स्वायत्त जिला परिषदों (ADCs) के गठन का अधिकार देता है, जो भूमि प्रबंधन, जंगलों की सुरक्षा और स्थानीय अदालतों के गठन जैसे मामलों में कानून बनाने की व्यापक शक्ति देती हैं।

एक सरल उदाहरण से समझें: इसे आप एक ऐसे ‘सुरक्षित समुदाय’ (Gated Community) की तरह मान सकते हैं, जहां रहने वाले लोग अपनी जमीन, पर्यावरण और स्थानीय संसाधनों के इस्तेमाल के नियम खुद तय करते हैं। बाहरी लोगों को वहां जमीन खरीदने या मनमर्जी से व्यापार करने की छूट नहीं होती। चूंकि लद्दाख की 90% से ज्यादा आबादी जनजातीय है, इसलिए वे इस विशेष संवैधानिक सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।

केंद्र शासित प्रदेश बनाम राज्य

भारतीय संविधान में संघवाद (Federalism) को संविधान का बुनियादी ढांचा (Basic Structure) माना गया है। लद्दाख को बिना विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनाकर केंद्र ने सत्ता का केंद्रीकरण कर दिया है, जिसे स्थानीय लोग अपनी राजनीतिक स्वायत्तता के लिए एक बड़ी चुनौती मानते हैं।

यहाँ आपको ‘असिमेट्रिक फेडरलिज्म’ (Asymmetric Federalism – असममित संघवाद) का सिद्धांत समझना चाहिए। इसे एक सरल उदाहरण से समझते हैं: जैसे एक माता-पिता अपने अलग-अलग बच्चों की जरूरतों के हिसाब से उन्हें अलग-अलग सुविधाएं या नियम देते हैं, वैसे ही हमारा संविधान भी सभी राज्यों को एक समान तराजू में नहीं तौलता। पूर्वोत्तर के राज्यों और पहाड़ी क्षेत्रों की विशिष्ट आवश्यकताओं को देखते हुए संविधान के अनुच्छेद 371 के तहत उन्हें विशेष अधिकार दिए गए हैं। लद्दाख के लोग भी इसी सिद्धांत के तहत अपने अधिकारों की रक्षा के लिए विशेष राज्य की मांग कर रहे हैं।

पर्यावरणीय और आर्थिक अंतर्संबंध

लद्दाख का आंदोलन केवल राजनीति तक सीमित नहीं है। इसका दूसरा और सबसे संवेदनशील पहलू वहां के नाजुक पर्यावरण और सतत विकास (Sustainable Development) से जुड़ा है। लद्दाख एक ‘शीत मरुस्थल’ (Cold Desert) है, जिसका पारिस्थितिकी तंत्र बहुत नाजुक है।

  • ग्लेशियर और जैव विविधता पर खतरा: स्थानीय समुदायों को डर है कि यदि उन्हें संवैधानिक संरक्षण नहीं मिला, तो बाहरी पूंजीपति और बड़ी कंपनियां वहां आकर अनियंत्रित खनन और व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर देंगी। इससे लद्दाख के ग्लेशियर, जल स्रोत और दुर्लभ प्रजातियां हमेशा के लिए खत्म हो सकती हैं।
  • ‘वहन क्षमता’ (Carrying Capacity) के अनुकूल विकास: लद्दाख के लोगों का मानना है कि विकास का मॉडल बाहर से थोपा हुआ नहीं होना चाहिए। वहां की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए विकास की योजनाएं पारिस्थितिक वहन क्षमता (Carrying Capacity) के हिसाब से बननी चाहिए। छठी अनुसूची से मिलने वाले अधिकार यह सुनिश्चित करेंगे कि विकास स्थानीय लोगों की सहमति और पर्यावरण की सुरक्षा के साथ हो।

अभ्यास प्रश्न (Prelims MCQ)

प्रश्न: भारतीय संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. यह अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन से संबंधित है।
  2. इस अनुसूची के तहत गठित स्वायत्त जिला परिषदों (ADCs) के पास कानून बनाने की शक्ति नहीं होती है।
  3. यह अनुसूची जनजातीय आबादी की सांस्कृतिक और भूमि संबंधी सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक तंत्र प्रदान करती है।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A. केवल 1 और 2
B. केवल 2 और 3
C. केवल 1 और 3
D. 1, 2 और 3

उत्तर: C

व्याख्या: कथन 2 गलत है क्योंकि छठी अनुसूची के तहत गठित स्वायत्त जिला परिषदों (ADCs) के पास विशिष्ट विषयों जैसे भूमि, वन, नहर के पानी, विरासत और विवाह आदि पर नियम और कानून बनाने की व्यापक शक्तियां होती हैं। कथन 1 और 3 सही हैं।

मुख्य परीक्षा प्रश्न (Mains Descriptive Question)

प्रश्न: “केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा लद्दाख की विशिष्ट जनजातीय पहचान और पारिस्थितिक संवेदनशीलता की सुरक्षा के लिए नाकाफी साबित हो रहा है।” इस कथन के आलोक में लद्दाख की मांगों के संवैधानिक और विकासात्मक निहितार्थों का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।

उत्तर के लिए मुख्य बिंदु (Model Answer Points):

यदि आप इस प्रश्न का एक बेहतरीन उत्तर लिखना चाहते हैं, तो अपने उत्तर को निम्नलिखित संरचना में विभाजित करें:

  • भूमिका (Introduction): साल 2019 के बाद लद्दाख की बदली प्रशासनिक स्थिति और स्थानीय समुदायों में उत्पन्न असुरक्षा की भावना का संक्षेप में उल्लेख करें।
  • संवैधानिक निहितार्थ (Constitutional Implications): समझाएं कि छठी अनुसूची लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण (Democratic Decentralization) को कैसे मजबूत करती है और जनजातीय संस्कृति के संरक्षण में इसकी क्या भूमिका है।
  • विकास बनाम पर्यावरण (Development vs. Environment):िगालिका क्षेत्र में विकास के मॉडल में स्थानीय समुदाय की भागीदारी क्यों आवश्यक है, इसका विश्लेषण करें। पारिस्थितिक वहन क्षमता (Carrying Capacity) के सिद्धांत का संदर्भ अवश्य दें।
  • संघीय ढांचा और चुनौतियां (Federal Challenges): केंद्र शासित प्रदेश की केंद्रीकृत प्रशासनिक व्यवस्था बनाम स्थानीय लोकतांत्रिक स्वायत्तता के बीच के अंतर को स्पष्ट करें।
  • आगे की राह: एक संतुलित समाधान पेश करें, जिसमें समझाएं कि लद्दाख के रणनीतिक और पर्यावरण महत्व को देखते हुए केंद्र सरकार को स्थानीय आकांक्षाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों के बीच संतुलन बनाने की जरूरत है। इसका समाधान केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और संवैधानिक संवाद से ही संभव है।

यह अध्ययन नोट IAS EasyWay की दैनिक समसामयिकी पहल का एक हिस्सा है। ऐसे ही अधिक दैनिक समसामयिकी और अध्ययन सामग्री के लिए IAS EasyWay पर निरंतर आते रहें।


🎓

लेखिका के बारे में: भाग्यश्री

भाग्यश्री एक वरिष्ठ सिविल सेवा मेंटर और शिक्षक हैं, जिन्हें UPSC और MPSC उम्मीदवारों का मार्गदर्शन करने का 8 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे खुद कई बार सिविल सेवा मुख्य परीक्षा दे चुकी हैं और सैकड़ों सफल प्रशासनिक अधिकारियों को प्रशिक्षित किया है। वे GS सिलेबस और CSAT पद्धतियों के जटिल विषयों को परीक्षा-उपयोगी और सरल रूप में समझाने में माहिर हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

© 2026 iaseasyway.com. All Rights Reserved.