बाह्य क्षेत्र (External Sector): परिचय एवं महत्व
भारतीय अर्थव्यवस्था का ‘बाह्य क्षेत्र’ (External Sector) उन सभी आर्थिक गतिविधियों का प्रतिनिधित्व करता है जो देश की सीमाओं के पार अन्य देशों या अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ की जाती हैं। इसमें वस्तुओं और सेवाओं का आयात-निर्यात, विदेशी निवेश (FDI और FPI), बाह्य ऋण, विदेशों से प्राप्त प्रेषित धन (Remittances), विदेशी मुद्रा भंडार और विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संगठनों (जैसे IMF, World Bank, WTO) के साथ संबंध शामिल हैं। सरल शब्दों में, बाह्य क्षेत्र किसी घरेलू अर्थव्यवस्था को वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़ने वाला सेतु है।
सिविल सेवा परीक्षा (UPSC, UPPSC, BPSC, MPPSC, RPSC) के दृष्टिकोण से बाह्य क्षेत्र का अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में अक्सर विदेशी मुद्रा भंडार के घटकों, भुगतान संतुलन के खातों, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के नियमों और विश्व व्यापार संगठन (WTO) के अभ्यास और चर्चा: इस अध्याय से संबंधित मुख्य परीक्षा (Mains) के प्रश्न UPPSC और BPSC में बार-बार पूछे जाते हैं, अतः विद्यार्थी इनका अभ्यास अवश्य करें। यदि आपके पास कोई प्रश्न है, तो नीचे टिप्पणी (comment) अनुभाग में पूछें।
ग. सामान्य गलतियां जिनसे बचना है
