संघ और उसका राज्यक्षेत्र एवं नागरिकता (Union and its Territory & Citizenship) – UPSC और राज्य सेवा परीक्षाओं के लिए संपूर्ण अध्ययन नोट्स

भारतीय संविधान का दर्शन और उसकी प्रशासनिक संरचना देश की भौगोलिक अखंडता और उसके लोगों की पहचान से निर्धारित होती है। संविधान के प्रथम दो भाग—भाग I (संघ और उसका राज्यक्षेत्र) तथा भाग II (नागरिकता)—भारतीय राज्य व्यवस्था के बुनियादी स्तंभ हैं। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और विभिन्न राज्य लोक सेवा आयोगों (UPPSC, BPSC, MPPSC, RPSC आदि) की परीक्षाओं के सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-II (Indian Polity and Governance) में इस विषय से प्रत्येक वर्ष प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा में महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे जाते हैं। यह अध्ययन सामग्री इन दोनों विषयों की अवधारणात्मक स्पष्टीकरण, संवैधानिक प्रावधानों, ऐतिहासिक विकासक्रम, प्रमुख न्यायिक निर्णयों और परीक्षा उपयोगी दृष्टिकोण का एक व्यापक संकलन है।


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h2>1. भाग I: संघ और उसका राज्
ुनर्गठन का उदाहरण देकर अपने उत्तर को पुष्ट करें।

  • नागरिकता और मानवाधिकार: अवैध प्रवासियों, शरणार्थियों (रोहिंग्या, चकमा शरणार्थी) और सीएए (CAA) के मुद्दों को मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय कानूनों (जैसे नॉन-रिफाउलमेंट का सिद्धांत) के संदर्भ में विश्लेषित करें।
  • समसामयिक विमर्श: एक राष्ट्र एक चुनाव (One Nation One Election) या नए राज्यों की मांग (जैसे बोडोलैंड, हरित प्रदेश) जैसे विषयों को हमेशा भाग I के संवैधानिक प्रावधानों से जोड़कर देखें।
  • सामान्य गलतियां जिनसे बचें:

    • भ्रम: यह सोचना कि नए राज्यों के गठन के लिए 368 के तहत विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है। याद रखें कि अनुच्छेद 4 के अनुसार यह केवल साधारण बहुमत से किया जाता है।
    • भ्रम: यह मानना कि नागरिकता का अधिकार असीमित है। अनुच्छेद 11 संसद को नागरिकता के किसी भी कानून को बदलने की पूर्ण शक्ति देता है।

    अभ्यास और चर्चा: इस अध्याय से संबंधित मुख्य परीक्षा (Mains) के प्रश्न UPPSC और BPSC में बार-बार पूछे जाते हैं, अतः विद्यार्थी इनका अभ्यास अवश्य करें। यदि आपके पास कोई प्रश्न है, तो नीचे टिप्पणी (comment) अनुभाग में पूछें।

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