मौलिक अधिकार, राज्य के नीति निदेशक तत्व और मौलिक कर्तव्य – संपूर्ण अध्ययन नोट्स (UPSC, UPPSC, BPSC, MPPSC, RPSC)
1. प्रस्तावना (Introduction)
भारतीय संविधान दर्शन, न्याय और समानता के सिद्धांतों पर आधारित एक जीवंत दस्तावेज है। इसके अंतर्गत भाग III में वर्णित ‘मौलिक अधिकार’ (Fundamental Rights – FR), भाग IV में वर्णित ‘राज्य के नीति निदेशक तत्व’ (Directive Principles of State Policy – DPSP) और भाग IV-A में वर्णित ‘मौलिक कर्तव्य’ (Fundamental Duties – FD) मिलकर भारतीय राज्यव्यवस्था के नैतिक और लोकतांत्रिक ताने-बाने का निर्माण करते हैं। इन्हें सामूहिक रूप से संविधान का अंतःकरण (Conscience of the Constitution) कहा जाता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical Background)
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ही नागरिकों के अधिकारों और राज्य के कर्तव्यों की मांग उठने लगी थी। वर्ष 1931 के कांग्रेस के कराची अधिवेशन में पहली बार मौलिक अधिकारों से संबंधित प्रस्ताव पारित किया गया था। स्वतंत्रता के पश्चात, तेज अभ्यास और चर्चा: इस अध्याय से संबंधित मुख्य परीक्षा (Mains) के प्रश्न UPPSC और BPSC में बार-बार पूछे जाते हैं, अतः विद्यार्थी इनका अभ्यास अवश्य करें। यदि आपके पास कोई प्रश्न है, तो नीचे टिप्पणी (comment) अनुभाग में पूछें।
सामान्य गलतियां जिनसे बचें:
