दिशा परीक्षण (Direction Sense Test) – संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (UPPSC, BPSC, MPPSC, RPSC) के लिए विस्तृत अध्ययन नोट्स

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (CSE Prelims) के द्वितीय प्रश्नपत्र, जिसे सामान्यतः सीसैट (CSAT – Civil Services Aptitude Test) कहा जाता है, में तार्किक अभिक्षमता (Logical Reasoning) का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अंकदायी भाग ‘दिशा परीक्षण’ (Direction Sense Test) है। न केवल संघ लोक सेवा आयोग बल्कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC), बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC), मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) तथा राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) जैसी प्रतिष्ठित राज्य सिविल सेवा परीक्षाओं में भी इस विषय से प्रतिवर्ष 2 से 4 प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं। यह विषय अभ्यर्थियों की स्थानिक समझ (Spatial Awareness), तार्किक विश्लेषण क्षमता और मानसिक चित्रण की गति का परीक्षण करता है। एक भावी प्रशासनिक अधिकारी के रूप में, भौगोलिक क्षेत्रों, मानचित्रों और दि

सापेक्ष दिशा (Relative Direction) को गलत समझना: प्रश्न में दो तरह से पूछा जा सकता है:

  1. “अब वह किस दिशा में जा रहा है?” (इसका उत्तर अंतिम मोड़ की दिशा होगी)।
  2. “अब वह प्रारंभिक बिंदु से किस दिशा में है?” (इसका उत्तर प्रारंभिक बिंदु पर खड़े होकर अंतिम बिंदु को देखने पर मिलने वाली दिशा होगी)।
    इन दोनों वाक्यों के अंतर को ध्यान से समझें।
</li>
<li><strong>पाइथागोरस प्रमेय का गलत चयन:</strong> न्यूनतम दूरी पूछते समय जल्दबाजी में लंबवत और क्षैतिज दूरियों को सीधे जोड़ने की गलती न करें। हमेशा सीधी दूरी (कर्ण) के लिए वर्गमूल सूत्र का ही प्रयोग करें।</li>
<li><strong>परछाईं वाले प्रश्नों में समय पर ध्यान न देना:</strong> यदि प्रश्न में समय दोपहर के 12 बजे का दिया गया है, तो उसकी कोई परछाईं नहीं बनेगी। परीक्षा में अक्सर समय की स्थिति (सूर्योदय या सूर्यास्त) को ध्यान से पढ़े बिना उत्तर देने पर गलती होती है।</li>

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